
बिहार में 5 सीटों पर होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर एनडीए उम्मीदवारों की तस्वीर अब साफ होती जा रही है। भारतीय जनता पार्टी के बाद अब Rashtriya Lok Morcha (आरएलएम) ने भी अपनी ओर से उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। तमाम अटकलों को खारिज करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Upendra Kushwaha के नाम पर सहमति बनी है।
5 मार्च को नामांकन करेंगे कुशवाहा

पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता नितिन भारती ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि उपेंद्र कुशवाहा एनडीए प्रत्याशी के रूप में 5 मार्च को बिहार विधानसभा में अपना नामांकन दाखिल करेंगे। उन्होंने कहा कि एनडीए के शीर्ष नेतृत्व के बीच विचार-विमर्श और आपसी सहमति के बाद यह निर्णय लिया गया है और नामांकन के समय सभी घटक दलों के नेता मौजूद रहेंगे।
पांचवीं सीट पर अब चुनाव तय
कुशवाहा के नाम की घोषणा के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि अब बिहार में पांचवीं राज्यसभा सीट के लिए मतदान होना तय है। बीजेपी पहले ही Nitin Nabin और Shivesh Kumar Ram के नाम घोषित कर चुकी है, जबकि दो सीटों पर Janata Dal (United) (जेडीयू) का दावा है। ऐसे में एनडीए उम्मीदवारों की कुल संख्या 5 हो गई है।
यदि महागठबंधन भी अपना प्रत्याशी मैदान में उतारता है तो उम्मीदवारों की संख्या 6 हो जाएगी, जिससे 16 मार्च को मतदान कराना अनिवार्य होगा।
शिवेश राम होंगे पांचवें उम्मीदवार?
प्राथमिकता क्रम के अनुसार नितिन नबीन, जेडीयू के दोनों संभावित उम्मीदवार और उपेंद्र कुशवाहा एनडीए के पहले चार प्रत्याशी माने जा रहे हैं, जबकि शिवेश कुमार राम पांचवें उम्मीदवार होंगे। ऐसे में यदि मतदान की स्थिति बनती है तो असली मुकाबला पांचवीं सीट के लिए होगा।
बिहार बीजेपी अध्यक्ष Sanjay Saraogi ने कहा, “उपेंद्र कुशवाहा एनडीए के चौथे उम्मीदवार और शिवेश राम पांचवें उम्मीदवार के रूप में नामांकन करेंगे।”
क्या कहते हैं जानकार?
राजनीतिक विश्लेषक Sanjay Kumar का कहना है कि उपेंद्र कुशवाहा ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक पकड़ साबित की है। उनके मुताबिक, लोकसभा चुनाव के दौरान भी कुशवाहा अपने लिए सीट सुनिश्चित करने में सफल रहे थे और अब राज्यसभा का टिकट हासिल कर लिया है। वहीं, उन्होंने कहा कि कुछ सहयोगी दलों को इस फैसले से निराशा हो सकती है।
क्या है चुनावी गणित?
एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। एनडीए के पास कुल 202 विधायक हैं, जिससे उसकी 4 सीटों पर जीत लगभग तय मानी जा रही है। हालांकि, पांचवीं सीट के लिए उसे 3 अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ेगी।
दूसरी ओर, महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं। ऐसे में All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen (AIMIM) के 5 और Bahujan Samaj Party (BSP) के एक विधायक का समर्थन निर्णायक साबित हो सकता है। AIMIM पहले ही संकेत दे चुका है कि वह भी अपना प्रत्याशी उतार सकता है।
बिहार की पांचवीं राज्यसभा सीट पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं, जहां मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है।


