अब हर जिले में होगा ‘नारकोटिक्स थाना’! नशे के सौदागरों पर नीतीश सरकार का ‘मास्टरस्ट्रोक’; जानें पूरा प्लान

पटना | 03 मार्च, 2026

खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):

  • बड़ा फैसला: साइबर थानों की तर्ज पर बिहार के सभी 38 जिलों में खुलेंगे विशेष ‘नारकोटिक्स थाने’।
  • नया सेटअप: मद्य निषेध और नारकोटिक्स ब्यूरो को मिलाकर बनी नई सुपर यूनिट; एडीजी संभालेंगे कमान।
  • सख्ती: ‘सूखे नशे’ (ड्रग्स) के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान; 218 एंटी लीकर टास्क फोर्स (ALTF) अब ब्यूरो के अधीन।
  • भर्ती: 88 नए पदों का सृजन, 229 पुराने पदों का ट्रांसफर; संविदा पर भी होगी बहाली।

पटना: बिहार को शराब के साथ-साथ अब ‘नशा मुक्त’ बनाने के लिए नीतीश सरकार ने अपनी सबसे बड़ी घेराबंदी शुरू कर दी है। राज्य में पैर पसार रहे स्मैक, चरस और अन्य सिंथेटिक ड्रग्स यानी ‘सूखे नशे’ की कमर तोड़ने के लिए पुलिस महकमे में एक क्रांतिकारी बदलाव होने जा रहा है। अब बिहार के हर जिले में अपना एक नारकोटिक्स थाना होगा। इसका सीधा मतलब यह है कि नशे के सौदागरों को अब स्थानीय रसूख का फायदा नहीं मिलेगा और उनके केस की जांच ‘सुपर स्पेशलिस्ट’ टीम करेगी।

साइबर थाने की तर्ज पर ‘नारकोटिक्स पुलिसिंग’

​बिहार पुलिस ने प्रस्ताव दिया है कि जिस तरह साइबर अपराध से निपटने के लिए हर जिले में अलग थाने खोले गए, ठीक वैसे ही नारकोटिक्स ब्यूरो के भी थाने हों।

  • मकसद: नशीले पदार्थों से जुड़े केसों की जांच (Investigation) में तेजी लाना।
  • स्पीडी ट्रायल: जिला स्तर पर थाना होने से गवाहों और सबूतों को जुटाना आसान होगा, जिससे अपराधियों को जल्द से जल्द सजा दिलाई जा सकेगी।
  • वर्तमान स्थिति: फिलहाल राज्यस्तरीय थाना अधिसूचित नहीं होने के कारण ये केस अभी भी आर्थिक अपराध इकाई (EOU) में दर्ज हो रहे हैं।

E0U और CID से निकलकर बनी ‘सुपर यूनिट’

​सरकार ने हाल ही में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए मद्य निषेध एवं स्वापक नियंत्रण ब्यूरो का गठन किया है।

  1. मिश्रण: आर्थिक अपराध इकाई (EOU) से ‘नारकोटिक्स’ और CID से ‘मद्य निषेध’ (Prohibition) यूनिट को निकालकर इस नए ब्यूरो में समाहित किया गया है।
  2. नेतृत्व: यह पूरी इकाई एडीजी (मद्य निषेध) की सीधी निगरानी में काम करेगी, जो राज्यस्तरीय एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के अध्यक्ष भी होंगे।
  3. मैनपावर: ब्यूरो को मजबूत करने के लिए 88 नए पद बनाए गए हैं, जबकि 229 पुराने पदों को हस्तांतरित किया जा रहा है। 12 पदों पर संविदा (Contract) के आधार पर विशेषज्ञों की नियुक्ति होगी।

218 एंटी लीकर टास्क फोर्स (ALTF) को मिली नई जिम्मेदारी

​अब तक शराबबंदी को लागू करने वाली 218 एएलटीएफ टीमें अब सीधे इस ब्यूरो के इशारे पर काम करेंगी।

  • विस्तार: जिला, अनुमंडल और अंचल स्तर पर तैनात ये टीमें अब शराब के साथ-साथ स्मैक और गांजे की तस्करी पर भी नकेल कसेंगी।
  • नई संरचना: एडीजी जल्द ही जिला स्तरीय ‘एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स’ के गठन और उनकी कार्यशैली को लेकर नए आदेश जारी करने वाले हैं।

VOB का नजरिया: क्या ‘उड़ता बिहार’ बनने से रुक पाएगा?

​बिहार में शराबबंदी के बाद ‘सूखे नशे’ का कारोबार एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। गली-मोहल्लों में बिकने वाले स्मैक ने युवाओं की रगों में जहर घोलना शुरू कर दिया है। ऐसे में हर जिले में समर्पित नारकोटिक्स थाना होना एक बेहतरीन कदम है। लेकिन चुनौती ‘पदों के हस्तांतरण’ और ‘अधिसूचना’ की सुस्ती को दूर करने की है। अगर ये थाने कागजों से निकलकर जमीन पर जल्दी आते हैं, तो निश्चित रूप से बिहार के युवाओं का भविष्य सुरक्षित होगा।

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