
बेगूसराय | 03 मार्च, 2026
खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):
- गिरफ्तारी: बेगूसराय पुलिस ने फर्जी महिला दरोगा बनकर ठगी करने वाली युवती को पकड़ा।
- पहचान: 27 वर्षीय कजोमा कुमारी उर्फ निशु कुमारी के रूप में हुई पहचान।
- ठगी का तरीका: खुद को कोर्ट में तैनात दरोगा बताकर केस की ‘पैरवी’ के नाम पर वसूलती थी रुपये।
- बरामदगी: पुलिस की वर्दी, नेम प्लेट, फर्जी आईडी और मोबाइल फोन जब्त।
बेगूसराय: बिहार के बेगूसराय में खाकी की आड़ में ठगी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक युवती असली दरोगा बनकर लोगों को चूना लगा रही थी। मुफस्सिल थाने की पुलिस ने एक ऐसी ‘फर्जी दरोगा’ को गिरफ्तार किया है, जो रौब जमाकर न केवल लोगों से पैसे ऐंठती थी, बल्कि खुद को कोर्ट में तैनात बताकर कानूनी मामलों को सुलझाने का झांसा भी देती थी।
किराए के मकान से चल रहा था ‘फर्जी थाना’
पकड़ी गई महिला की पहचान कजोमा कुमारी उर्फ निशु कुमारी के रूप में हुई है। वह बेगूसराय के बड़ी एघु इलाके में एक किराए के मकान में रह रही थी।
- शातिराना चाल: निशु ने इलाके में यह प्रचार कर रखा था कि वह बिहार पुलिस में सब-इंस्पेक्टर है और वर्तमान में उसकी ड्यूटी कोर्ट में है।
- वसूली का खेल: वह मुकदमों की जांच और पैरवी (सिफारिश) करने के नाम पर सीधे-सादे लोगों से मोटी रकम वसूलती थी। वर्दी के रौब के कारण किसी को उस पर शक नहीं होता था।
पुलिस की छापेमारी: खुली पोल, मिली वर्दी और फर्जी आईडी
मुफस्सिल पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि एक महिला संदिग्ध रूप से पुलिस की वर्दी का गलत इस्तेमाल कर रही है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने बड़ी एघु स्थित उसके ठिकाने पर छापेमारी की।
- रंगे हाथ पकड़ी गई: छापेमारी के दौरान पुलिस ने कजोमा को हिरासत में लिया।
- तलाशी में क्या मिला? कमरे की तलाशी के दौरान पुलिस को एक सेट पुलिस की वर्दी, उसकी नेम प्लेट, एक फर्जी आईडी कार्ड और एक मोबाइल फोन बरामद हुआ।
जांच में जुटी पुलिस: कितने हुए शिकार?
बेगूसराय पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि निशु ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है और ठगी की रकम कहाँ निवेश की गई। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस खेल में उसके साथ कोई और भी शामिल था या वह अकेले ही इस ‘फर्जीवाड़े’ को अंजाम दे रही थी।
VOB का नजरिया: वर्दी का सम्मान और आपकी सतर्कता
खाकी केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि राज्य के इकबाल का प्रतीक है। जब निशु जैसी अपराधी वर्दी का दुरुपयोग करती हैं, तो आम जनता का भरोसा डगमगाता है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ नागरिकों से अपील करता है कि किसी भी अधिकारी पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। यदि कोई ‘पैरवी’ के नाम पर रुपये मांगे, तो समझ जाएं कि मामला संदिग्ध है।


