Gopalganj Bridge Collapse: बिहार में फिर गिरा निर्माणाधीन पुल! नीतीश सरकार की बड़ी कार्रवाई, 3 इंजीनियर सस्पेंड; ठेकेदार पर भी गिरेगी गाज

खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):

  • बड़ा हादसा: सिधवलिया में घोघरी नदी पर बन रहे पुल का एक स्पैन ढलाई के दौरान गिरा।
  • एक्शन: लापरवाही बरतने पर कार्यपालक, सहायक और कनीय अभियंता तत्काल प्रभाव से निलंबित।
  • लापरवाही: विभाग के आदेश के बावजूद ‘पुल सलाहकार’ से नहीं कराई गई थी DPR की जांच।
  • ब्लैकलिस्ट: मोतिहारी के संवेदक ‘बापूधाम कंस्ट्रक्शन’ के खिलाफ कार्रवाई शुरू।

गोपालगंज: बिहार में पुलों के गिरने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला गोपालगंज जिले के सिधवलिया प्रखंड से सामने आया है, जहाँ घोघरी नदी पर बन रहा आरसीसी पुल ढलाई के दौरान ही ताश के पत्तों की तरह ढह गया। घटना के बाद ग्रामीण कार्य विभाग (RWD) ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए विभाग के तीन इंजीनियरों को सस्पेंड कर दिया है। गनीमत यह रही कि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई, लेकिन पुल की गुणवत्ता और सरकारी तंत्र की सुस्ती पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

ढलाई के दौरान धंसा स्पैन: 4 दिन बाद होना था उद्घाटन!

​जानकारी के अनुसार, नाबार्ड राज्य योजना के तहत बखरौल कुर्मी टोला पथ पर घोघरी नदी के ऊपर यह पुल बनाया जा रहा था। सोमवार को जब एल-041 से एल-039 के बीच वाले हिस्से की ढलाई चल रही थी, तभी अचानक ढांचा चरमराकर नीचे गिर गया।

  • टारगेट: चौंकाने वाली बात यह है कि इस पुल को 6 मार्च, 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य था, यानी उद्घाटन से महज 4 दिन पहले यह ‘बड़ा कांड’ हो गया।

तीन अधिकारियों की छुट्टी: सस्पेंड हुए ये इंजीनियर

​ग्रामीण कार्य विभाग ने प्राथमिक जांच में कार्यपालक अभियंता (EE), सहायक अभियंता (AE) और कनीय अभियंता (JE) को कार्य में घोर लापरवाही का दोषी पाया है।

  1. मुख्य आरोप: विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि पुल के निर्माण से पहले ‘वरीय पुल सलाहकार’ से डीपीआर (DPR) की जांच करानी अनिवार्य है।
  2. उल्लंघन: इन इंजीनियरों ने ठेकेदार के साथ मिलकर इस निर्देश को ठंडे बस्ते में डाल दिया और बिना विशेषज्ञ जांच के निर्माण जारी रखा, जिसका नतीजा इस हादसे के रूप में सामने आया।

संवेदक पर ‘स्ट्राइक’: बापूधाम कंस्ट्रक्शन घेरे में

​हादसे के बाद मोतिहारी की कंपनी ‘बापूधाम कंस्ट्रक्शन’ के खिलाफ भी विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। कंपनी पर न केवल जुर्माना लगाया जा सकता है, बल्कि उसे ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। विभाग के वरीय पुल सलाहकार और नोडल पदाधिकारियों की टीम फिलहाल घटनास्थल पर जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री की क्वालिटी कैसी थी।

VOB का नजरिया: कागजी समीक्षा और जमीनी हकीकत

​बिहार में पुलों का गिरना अब कोई ‘दुर्घटना’ नहीं बल्कि एक ‘पैटर्न’ सा बन गया है। दिलचस्प बात यह है कि 28 फरवरी को ही विभाग ने समीक्षा बैठक में दोबारा आदेश दिया था कि सभी प्रोजेक्ट्स की डीपीआर चेक कराएं, लेकिन 2 मार्च को पुल गिर गया। सवाल यह है कि जब भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हों, तो क्या केवल तीन इंजीनियरों को सस्पेंड करना काफी है? क्या उन पर आर्थिक दंड और आपराधिक मुकदमा भी चलना चाहिए?

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