खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):
- एक्शन मोड: भागलपुर जिलाधिकारी ने समीक्षा भवन में आम लोगों की सुनीं समस्याएं।
- 7 निश्चय-3: योजना के तहत ‘Ease of Living’ को बेहतर बनाने पर जोर।
- निदान: पेंशन, भूमि विवाद और दाखिल-खारिज से जुड़े 20 आवेदनों पर हुई सुनवाई।
- उपस्थिति: सहायक समाहर्ता और वरीय उप समाहर्ता समेत कई बड़े अधिकारी रहे मौजूद।
भागलपुर: बिहार सरकार के विजन ‘7 निश्चय-3’ के तहत अब आम लोगों की समस्याओं का समाधान और भी आसान होने जा रहा है। इसी कड़ी में भागलपुर के जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी सोमवार को ‘सबका सम्मान- जीवन आसान’ (Ease of Living) अभियान के तहत पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आए। डीएम ने समाहरणालय स्थित समीक्षा भवन में जनसुनवाई की, जहाँ उन्होंने पीड़ितों की समस्याओं को न केवल सुना, बल्कि संबंधित अधिकारियों को त्वरित निष्पादन के सख्त निर्देश भी दिए।
20 आवेदनों पर हुई सुनवाई: जमीन से लेकर पेंशन तक के मामले
सोमवार को आयोजित इस जनसुनवाई में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों ने करीब 20 आवेदन जिलाधिकारी के समक्ष पेश किए। डीएम ने एक-एक कर सभी आवेदकों से बातचीत की और उनकी समस्याओं की गंभीरता को समझा। सुनवाई के दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दे छाए रहे:
- भूमि विवाद: पैतृक संपत्ति और पड़ोसियों के साथ चल रहे पुराने विवाद।
- भू-अर्जन: सरकारी योजनाओं के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजे और कागजी कार्यवाही से जुड़े मामले।
- दाखिल-खारिज: म्यूटेशन (Mutation) में हो रही देरी और राजस्व कर्मचारियों की शिकायतों पर चर्चा।
- लंबित पेंशन: बुजुर्गों और विधवा महिलाओं की पेंशन योजनाओं में आ रही तकनीकी बाधाओं को दूर करने के निर्देश।
अधिकारियों की टीम के साथ ‘ऑन द स्पॉट’ एक्शन
जिलाधिकारी ने सुनवाई के दौरान केवल आश्वासन नहीं दिया, बल्कि मौके पर मौजूद अधिकारियों को फाइलों के जल्द निपटारे की समय सीमा भी तय की। इस दौरान डीएम के साथ सहायक समाहर्ता श्री जतिन कुमार और वरीय उप समाहर्ता सुश्री अंकिता चौधरी सहित कई विभागीय पदाधिकारी उपस्थित थे। डीएम ने निर्देश दिया कि ‘इज ऑफ लिविंग’ का उद्देश्य तभी सफल होगा जब जनता को छोटे-छोटे कार्यों के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
VOB का नजरिया: पारदर्शिता से बढ़ेगा भरोसा
7 निश्चय-3 के तहत ‘सबका सम्मान- जीवन आसान’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि शासन को जनता के द्वार तक ले जाने की कोशिश है। भागलपुर में डीएम की इस सक्रियता से उन लोगों को बड़ी राहत मिली है जो महीनों से सरकारी दफ्तरों की धूल फांक रहे थे। दाखिल-खारिज और भूमि विवाद जैसे पेचीदा मामलों में डीएम का सीधा हस्तक्षेप भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगाने में मददगार साबित होगा।


