आबकारी विभाग की रेड और मच गई ‘मौत की भगदड़’; बुजुर्ग महिला की मौत के बाद पटना में भारी बवाल, लाठी-डंडे लेकर सड़क पर उतरे लोग

खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):

  • हादसा: बिक्रम के अख्तियारपुर मुसहरी में शराब के खिलाफ छापेमारी के दौरान मची भगदड़।
  • पीड़ित: भागने के क्रम में गिरने से बुजुर्ग महिला लक्ष्मीनीया देवी की मौत।
  • आक्रोश: ग्रामीणों ने बिक्रम-दुल्हिनबाजार मुख्य सड़क को घंटों तक रखा जाम।
  • पुलिस: डीएसपी और कई थानों की पुलिस ने मौके पर पहुँचकर संभाला मोर्चा।

पटना: बिहार में शराबबंदी को धरातल पर उतारने की कोशिशें एक बार फिर विवादों में हैं। पटना जिले के बिक्रम थाना क्षेत्र में सोमवार को आबकारी विभाग की एक कार्रवाई ने हिंसक मोड़ ले लिया। विभाग की टीम यहाँ शराब के ठिकानों पर छापेमारी करने पहुँची थी, लेकिन पुलिस की धमक ने ऐसी भगदड़ मचाई कि एक बेगुनाह बुजुर्ग महिला को अपनी जान गंवानी पड़ी। इस घटना के बाद पूरा इलाका रणक्षेत्र बन गया और ग्रामीणों ने घंटों तक सड़क पर तांडव किया।

पुलिस की दस्तक और ‘मौत’ की अफरा-तफरी

​जानकारी के अनुसार, आबकारी विभाग (Excise Department) की टीम को सूचना मिली थी कि अख्तियारपुर मुसहरी में अवैध शराब का निर्माण और बिक्री हो रही है। सोमवार को जैसे ही टीम ने गाँव में दस्तक दी, वहाँ हड़कंप मच गया। पुलिस से बचने के लिए लोग इधर-उधर भागने लगे। इसी भगदड़ में लक्ष्मीनीया देवी नाम की एक वृद्ध महिला संतुलन खोकर गिर गई। गंभीर चोट लगने और अफरा-तफरी के कारण मौके पर ही उनकी सांसें थम गईं।

सड़क पर ‘लाठी-तंत्र’ और मुआवजे की मांग

​महिला की मौत की खबर आग की तरह फैली और देखते ही देखते मुसहरी के सैकड़ों लोग लाठी-डंडे लेकर सड़क पर उतर आए।

  • चक्का जाम: आक्रोशित ग्रामीणों ने बिक्रम-दुल्हिनबाजार मुख्य सड़क को पूरी तरह जाम कर दिया।
  • नारेबाजी: लोग आबकारी विभाग की कार्यशैली को कोस रहे थे और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
  • मांग: पीड़ित परिवार के लिए उचित मुआवजे और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर लोग अड़े रहे।

भारी पुलिस बल तैनात, घंटों बाद खुला जाम

​हालात को बेकाबू होते देख डीएसपी पंकज कुमार शर्मा, इंस्पेक्टर चंद्रिका प्रसाद और बिक्रम थानाध्यक्ष प्रभात कुमार भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे।

  1. समझा-बुझाकर शांति: पुलिस अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों (अमित कुमार और पिंटू कुमार) ने ग्रामीणों से लंबी बातचीत की।
  2. आश्वासन: पुलिस ने निष्पक्ष जांच और मुआवजे की प्रक्रिया शुरू करने का भरोसा दिलाया, जिसके बाद ग्रामीण शांत हुए।
  3. पोस्टमार्टम: पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और यातायात बहाल करा दिया गया है।

VOB का नजरिया: क्या ‘खाकी’ के डर से मरेगी इंसानियत?

​शराबबंदी को सफल बनाने का दबाव अक्सर पुलिस को ऐसी जल्दबाजी वाली कार्रवाइयों के लिए मजबूर करता है, जिसमें आम और बेगुनाह नागरिक पिस जाते हैं। अख्तियारपुर मुसहरी की यह घटना सवाल उठाती है कि क्या छापेमारी के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया था? 9600 लीटर शराब पकड़ने वाली बहादुरी (जैसा गोपालगंज में हुआ) और इस तरह की ‘दुखद मौत’ के बीच की महीन लकीर को प्रशासन को समझना होगा।

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