भागलपुर | 02 मार्च, 2026: सिल्क सिटी के व्यस्ततम इलाकों में से एक तिलकामांझी आज दोपहर अचानक अफरा-तफरी का केंद्र बन गया। तिलकामांझी थाना क्षेत्र स्थित सरकारी बस डिपो में खड़ी एक बस में अचानक भीषण आग लग गई। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि देखते ही देखते पूरी बस लोहे के कंकाल में तब्दील होने लगी। गनीमत यह रही कि हादसा तब हुआ जब बस खाली थी, वरना बड़ी अनहोनी हो सकती थी।
बंदरों की मस्ती या बिजली का झटका?
हादसे की कहानी थोड़ी अजीब लेकिन चर्चा का विषय बनी हुई है:
- रूट: बस बांका से सवारियों को छोड़कर डिपो लौटी थी और पार्किंग में खड़ी थी।
- चर्चा: डिपो के कर्मचारियों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस की छत पर कुछ बंदरों ने लंबी छलांग लगाई थी। कयास लगाए जा रहे हैं कि बंदरों के कूदने से बिजली के तारों में घर्षण हुआ या वायरिंग ढीली हुई, जिससे शॉर्ट सर्किट हुआ और चिंगारी ने आग का रूप ले लिया।
दमकल की 4 गाड़ियों ने संभाला मोर्चा
आग लगते ही डिपो में मौजूद कर्मचारियों के हाथ-पांव फूल गए। डीजल और टायरों की वजह से आग ने विकराल रूप ले लिया था।
- त्वरित कार्रवाई: सूचना मिलते ही अग्निश्मन विभाग की टीम दमकल की 4 बड़ी गाड़ियों के साथ मौके पर पहुँची।
- कड़ी मशक्कत: दमकलकर्मियों ने काफी मेहनत के बाद आग को अन्य बसों तक फैलने से रोका और उस पर काबू पाया।
- नुकसान: बस पूरी तरह जल चुकी है, हालांकि किसी भी व्यक्ति के हताहत होने की खबर नहीं है।
VOB का नजरिया: क्या मेंटेनेंस में है झोल?
बंदरों वाली थ्योरी अपनी जगह है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी बसों की वायरिंग इतनी कमजोर है कि बंदरों के कूदने मात्र से आग लग जाए? तिलकामांझी डिपो में हर वक्त सैकड़ों लोग और दर्जनों बसें मौजूद रहती हैं। अगर यह आग चलती बस में या रात के वक्त लगती, तो परिणाम भयावह हो सकते थे। संबंधित विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुँचकर नुकसान का आकलन किया है, लेकिन असली जरूरत ‘सेफ्टी ऑडिट’ की है।


