तेहरान/तेल अवीव/पटना | 02 मार्च, 2026: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) से इस वक्त की सबसे दहला देने वाली खबर सामने आ रही है। ईरान और इजराइल के बीच जारी संघर्ष अब ‘महायुद्ध’ का रूप ले चुका है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उन्होंने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय और इजराइली वायु सेना कमांडर के ठिकानों पर भीषण मिसाइल हमला किया है। इस हमले के बाद इजराइली नेतृत्व में भारी हड़कंप है और दावा किया जा रहा है कि नेतन्याहू की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
खामेनेई की हत्या का बदला: तेहरान का ‘ऑपरेशन प्रतिशोध’
यह विनाशकारी मोड़ तब आया जब अमेरिका और इजराइल के एक संयुक्त अभियान में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या कर दी गई। इसके जवाब में ईरान ने न केवल इजराइली शहरों को निशाना बनाया, बल्कि खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी मिसाइलों और ड्रोनों की बारिश कर दी है। ईरान का दावा है कि जब तक दुश्मन को पूरी तरह तबाह नहीं कर दिया जाता, हमले नहीं रुकेंगे।
ट्रंप का खौफनाक अल्टीमेटम: “हथियार डालो वरना निश्चित मौत”
इधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए ईरानी सेना को सीधा संदेश भेजा है। ट्रंप के बयान के मुख्य बिंदु:
- सरेंडर की मांग: ट्रंप ने ईरानी सैन्य अधिकारियों से तुरंत हथियार डालने को कहा है।
- सुरक्षा की गारंटी: उन्होंने वादा किया कि अगर ईरानी सेना पीछे हटती है, तो उन्हें सुरक्षा की गारंटी दी जाएगी।
- अंतिम चेतावनी: “हथियार डालो वरना निश्चित मौत का सामना करने के लिए तैयार रहो… यह बेहद भयावह होगा।” ट्रंप ने स्पष्ट किया कि जब तक लक्ष्य हासिल नहीं हो जाते, अमेरिकी सैन्य अभियान जारी रहेगा।
परमाणु खतरा: IAEA प्रमुख की बड़ी चेतावनी
इस भीषण युद्ध के बीच पूरी दुनिया की नजरें ईरान के परमाणु संयंत्रों पर टिकी हैं। अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल मारियानो ग्रॉसी ने चेतावनी दी है:
- रेडियोधर्मी विकिरण: परमाणु संयंत्रों के आसपास की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। किसी भी हमले से रेडियोधर्मी विकिरण का रिसाव हो सकता है, जिसके परिणाम पूरी मानवता के लिए विनाशकारी होंगे।
- संपर्क टूटा: ग्रॉसी ने बताया कि ईरानी परमाणु नियामक अधिकारियों से संपर्क करने के सभी प्रयास विफल रहे हैं, जिससे खतरा और बढ़ गया है।
VOB का नजरिया: बिहार और भारत पर क्या होगा असर?
जब दुनिया की दो बड़ी ताकतें इस तरह आमने-सामने हों, तो इसका असर केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहता। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ के विश्लेषण के अनुसार:
- तेल की कीमतें: खाड़ी क्षेत्र में युद्ध से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आग लग सकती है, जिसका सीधा असर बिहार के आम आदमी की जेब पर पड़ेगा।
- प्रवासी भारतीय: बिहार और भारत के लाखों लोग खाड़ी देशों में काम करते हैं, जिनकी सुरक्षा अब सबसे बड़ी चिंता बन गई है।
- ग्लोबल मार्केट: शेयर बाजार में भारी गिरावट की आशंका है।


