“बिहार में उद्योगों के बीच भगदड़ जैसी स्थिति”: आरा सांसद सुदामा प्रसाद का सरकार पर तीखा हमला; बोले— “इथेनॉल फैक्ट्री लगाकर माथा ठोक रहे उद्यमी”

भागलपुर/आरा | 02 मार्च, 2026: भागलपुर दौरे पर पहुँचे आरा सांसद और भाकपा (माले) के कद्दावर नेता सुदामा प्रसाद ने बिहार की औद्योगिक नीति और व्यापारियों की स्थिति पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में उद्योग लगाने वाले निवेशकों के बीच भारी अनिश्चितता और ‘भगदड़’ का माहौल है। सांसद ने केंद्र और राज्य, दोनों सरकारों को विकास के दावों पर कटघरे में खड़ा किया।

इथेनॉल नीति पर सवाल: “निवेशक अब पछता रहे हैं”

​सुदामा प्रसाद ने औद्योगिक बदहाली को समझाने के लिए अपने गृह क्षेत्र आरा का उदाहरण दिया:

  • नीतिगत अस्थिरता: उन्होंने बताया कि आरा में एक व्यवसायी ने बड़े उत्साह के साथ इथनॉल फैक्ट्री लगाई थी, लेकिन सरकारी नीतियों में बार-बार हो रहे बदलाव और बाजार की अनिश्चितता के कारण आज वह उद्यमी ‘माथा ठोकने’ को मजबूर है।
  • दावा: उनके अनुसार, सरकार निवेशकों को बुलाती तो है, लेकिन उन्हें टिकाऊ और भरोसेमंद वातावरण देने में पूरी तरह विफल रही है।

ऑनलाइन बनाम ऑफलाइन: “छोटे व्यापारियों का वजूद खतरे में”

​सांसद ने तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स (Online Business) पर भी चिंता जताई:

  • पारंपरिक व्यापार पर चोट: सुदामा प्रसाद ने कहा कि बड़ी ऑनलाइन कंपनियों के वर्चस्व के कारण स्थानीय और मध्यम स्तर के व्यापारियों का धंधा ठप हो रहा है।
  • मांग: उन्होंने सरकार से मांग की कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए सख्त रेगुलेशन बनाए जाएं और स्थानीय छोटे व्यापारियों की सुरक्षा के लिए विशेष आर्थिक पैकेज लाया जाए।

केंद्र की आर्थिक नीतियों पर निशाना

​सांसद ने केवल बिहार ही नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के फैसलों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि बिना जमीनी तैयारी के लागू किए गए आर्थिक फैसलों से बाजार में भ्रम की स्थिति पैदा हुई है, जिससे व्यापार जगत का आत्मविश्वास डगमगाया है।

VOB का नजरिया: क्या सच में निवेशकों का मोहभंग हो रहा है?

​सुदामा प्रसाद का बयान एक ऐसे समय में आया है जब बिहार सरकार ‘इन्वेस्ट बिहार’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए निवेश लाने का दावा कर रही है। हालांकि, आरा का ‘इथेनॉल’ वाला उदाहरण नीतिगत खामियों की ओर इशारा करता है। ऑनलाइन व्यापार का मुद्दा भी बिहार के बाजारों के लिए एक कड़वी सच्चाई है। क्या सरकार इन ‘भगदड़’ जैसे शब्दों को गंभीरता से लेकर अपनी नीतियों में सुधार करेगी, यह एक बड़ा सवाल है।

  • Related Posts

    रजौन में ‘जमीन की जंग’, अपनों ने ही बहाया खून! 2008 के बंटवारे पर ‘गोतिया’ में खूनी संघर्ष; एक की हालत नाजुक

    Share Add as a preferred…

    Continue reading