बिहार राज्यसभा चुनाव: तेजस्वी यादव खुद उतरेंगे मैदान में? राजश्री राघोपुर से लड़ेगी विधानसभा उपचुनाव… चर्चा तेज

बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया 26 फरवरी से शुरू हो चुकी है, जबकि मतदान 16 मार्च को होगा। विधानसभा के मौजूदा संख्या बल को देखते हुए सत्तारूढ़ एनडीए चार सीटों पर मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहा है। पांचवीं सीट को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है और इसी बीच राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने नई रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।

तेजस्वी यादव की केंद्र की राजनीति में एंट्री की तैयारी

सूत्रों के अनुसार, राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव अब राज्य की राजनीति से आगे बढ़कर केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं। चर्चा है कि वे राज्यसभा चुनाव में राजद उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतर सकते हैं।

इसको लेकर 1 मार्च को पार्टी के पार्लियामेंट्री बोर्ड की अहम बैठक बुलाई गई है, जिसकी अध्यक्षता स्वयं तेजस्वी यादव करेंगे। बैठक में संगठनात्मक मुद्दों, आगामी चुनावी रणनीति और राज्यसभा चुनाव को लेकर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।

राजनीतिक जानकार इसे उत्तर प्रदेश की तर्ज पर देखा जा रहा है, जहां विधानसभा चुनाव में हार के बाद Akhilesh Yadav ने केंद्र की राजनीति में सक्रियता बढ़ाई थी। अब तेजस्वी भी वैसी ही रणनीति अपना सकते हैं।

राज्यसभा का गणित: 41 वोट की जरूरत

बिहार विधानसभा के वर्तमान गणित के अनुसार, राज्यसभा चुनाव में एक उम्मीदवार की जीत के लिए कम से कम 41 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी। अभी पांच में से तीन सीटें एनडीए के पास हैं, जबकि दो सीटें Rashtriya Janata Dal (राजद) के पास हैं।

राजद के पास फिलहाल 25 विधायक हैं, जो जीत के आंकड़े से काफी कम है। हालांकि कांग्रेस के 6, वामदलों के 4 और आईपीपी के 1 विधायक को जोड़ने पर यह संख्या 35 तक पहुंचती है।

यदि एआईएमआईएम और बसपा के कुल 6 विधायक भी समर्थन देते हैं, तो यह आंकड़ा 41 तक पहुंच सकता है। ऐसे में तेजस्वी यादव की राज्यसभा में एंट्री का रास्ता साफ हो सकता है।

राजश्री को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

अगर तेजस्वी यादव राज्यसभा जाते हैं, तो राघोपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव होगा। ऐसी स्थिति में उनकी पत्नी राजश्री को राजद उम्मीदवार बनाया जा सकता है।

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि यदि राजश्री चुनाव जीतती हैं, तो उन्हें बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी दी जा सकती है।

फिलहाल सबकी नजर 1 मार्च को होने वाली राजद पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक पर टिकी है, जहां से राज्यसभा चुनाव को लेकर बड़ा फैसला सामने आ सकता है।

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