कैमूर में ‘खाकी’ का खौफ: मजदूरी मांगी तो महिला दरोगा ने कमरे में बंद कर पीटा; चोरी का झूठा आरोप लगाने का दावा, भभुआ में सफाईकर्मियों का भारी हंगामा

भभुआ (कैमूर) | 27 फरवरी, 2026: बिहार में ‘फ्रेंडली पुलिसिंग’ के दावों के बीच कैमूर से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भभुआ महिला थाना में तैनात एक नई महिला दरोगा पर एक विद्युत मिस्त्री के साथ बेरहमी से मारपीट करने और पैसे मांगने पर चोरी का झूठा इल्जाम लगाने का आरोप लगा है। इस घटना के बाद नगर परिषद के सैकड़ों सफाईकर्मी सड़क पर उतर आए और थाने का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया।

पूरा मामला: 5 घंटे की मेहनत और बदले में ‘लाठियां’

​पीड़ित संतोष कुमार रावत, जो नगर परिषद भभुआ में सफाईकर्मी हैं और बिजली मिस्त्री का काम भी करते हैं, ने अपनी आपबीती सुनाई:

  • बुलावा: महिला दरोगा चंद्र प्रभा ने उन्हें अपने आवास पर इन्वर्टर और वायरिंग ठीक करने के लिए बुलाया था।
  • विवाद की जड़: संतोष का दावा है कि उन्होंने करीब 5 घंटे कड़ी मेहनत कर काम पूरा किया। जब उन्होंने अपना मेहनताना (मजदूरी) मांगा, तो दरोगा का व्यवहार अचानक बदल गया।
  • क्रूरता: आरोप है कि दरोगा ने उन पर पैसे और गहने चोरी का झूठा आरोप मढ़ दिया। उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया गया और लाठी-डंडों से उनकी जमकर पिटाई की गई। साथ ही, थाने में केस दर्ज कर जेल भेजने की धमकी भी दी गई।

नगर परिषद का आक्रोश: “काम का बहिष्कार करेंगे”

​जैसे ही यह खबर फैली, नगर परिषद भभुआ के सभापति के नेतृत्व में सफाईकर्मियों का हुजूम थाने पहुँच गया।

  1. सुरक्षा पर सवाल: प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अगर एक सरकारी कर्मचारी के साथ थाने के भीतर ऐसा बर्ताव होगा, तो आम जनता किसके भरोसे रहेगी?
  2. चेतावनी: कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि अगर आरोपी महिला दरोगा को तत्काल निलंबित नहीं किया गया और उन पर कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे शहर के तमाम प्रशासनिक कार्यों का पूर्ण बहिष्कार करेंगे।

प्रशासनिक पहल: एसपी और एसडीपीओ मौके पर

​मामले के तूल पकड़ते ही कैमूर के पुलिस अधीक्षक (SP) हरिमोहन शुक्ला और भभुआ SDPO मौके पर पहुँचे।

  • आश्वासन: अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को शांत कराते हुए मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है।
  • कार्रवाई का वादा: प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर विधिसम्मत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

VOB का नजरिया: क्या ‘वर्दी’ का रसूख कानून से ऊपर है?

यह घटना कई चुभते हुए सवाल छोड़ गई है। क्या बिहार में एक गरीब मजदूर के लिए अपनी मेहनत की कमाई मांगना अब अपराध बन गया है? अगर चोरी का आरोप गलत साबित होता है, तो क्या महिला दरोगा पर केवल तबादले की ‘दिखावटी’ कार्रवाई होगी या उन्हें जेल की हवा खानी पड़ेगी? थाने के भीतर एक नागरिक की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा? ‘फ्रेंडली पुलिसिंग’ केवल विज्ञापनों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, इसे धरातल पर दिखने की जरूरत है।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।

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