सारण/मांझी | 27 फरवरी, 2026: बिहार के सारण जिले के लिए आज का दिन एक गहरी शोक की लहर लेकर आया है। मांझी प्रखंड के चकिया गांव के रहने वाले 35 वर्षीय एनएसजी (NSG) कमांडो प्रकाश यादव अब हमारे बीच नहीं रहे। जम्मू-कश्मीर की दुर्गम वादियों में देश की सुरक्षा का जिम्मा संभालते हुए, अचानक तबीयत बिगड़ने से उनका निधन हो गया। इस खबर ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है।
कर्तव्य पथ पर अंतिम सांस
मिली जानकारी के अनुसार, प्रकाश यादव जम्मू-कश्मीर में अपनी यूनिट के साथ ड्यूटी पर तैनात थे।
- घटना: ड्यूटी के दौरान वे अचानक बेहोश होकर गिर पड़े। साथी जवानों ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें नजदीकी सैन्य अस्पताल पहुँचाया।
- अंतिम क्षण: सैन्य चिकित्सकों की तमाम कोशिशों के बावजूद, उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। सेना के अधिकारियों ने परिवार को उनके वीर सपूत के जाने की दुखद सूचना दी है।
गांव का गौरव और युवाओं के प्रेरणास्रोत
प्रकाश यादव केवल एक जवान नहीं, बल्कि चकिया गांव के युवाओं के लिए ‘आइकन’ थे।
- मेधावी और अनुशासित: ग्रामीणों के अनुसार, वे बचपन से ही सेना में जाने का सपना देखते थे। अपनी कड़ी मेहनत से उन्होंने न केवल सेना में जगह बनाई, बल्कि देश के सबसे विशिष्ट बल, NSG में चयनित होकर गांव का नाम रोशन किया।
- मार्गदर्शक: छुट्टी पर आने पर वे अक्सर गांव के लड़कों को भर्ती की तैयारी के लिए टिप्स देते थे। उनकी प्रेरणा से आज कई युवा देश सेवा के लिए तैयार हो रहे हैं।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
प्रकाश अपने पीछे वृद्ध माता-पिता, पत्नी और छोटे-छोटे मासूम बच्चों को छोड़ गए हैं।
”बच्चों को तो यह भी नहीं पता कि उनके पिता का साया अब उनके सिर से उठ चुका है। पूरा गांव इस असहनीय दुख में परिवार के साथ खड़ा है।” — एक ग्रामीण
प्रशासन और सरकार से मांग
ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सरकार से पुरजोर मांग की है:
- राजकीय सम्मान: शहीद जवान को पूर्ण सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाए।
- आर्थिक सहायता: पीड़ित परिवार के भविष्य को देखते हुए उचित मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
- अमर स्मृति: गांव के किसी स्कूल या सार्वजनिक स्थल का नाम प्रकाश यादव के नाम पर रखा जाए ताकि उनकी वीरता की गाथा अमर रहे।
VOB का नजरिया: शहादत को नमन
प्रकाश यादव जैसे जांबाज ही हमारी नींद और सुकून की वजह हैं। एक किसान के बेटे का NSG कमांडो तक का सफर उनकी जिजीविषा को दर्शाता है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ इस वीर सपूत की शहादत को नमन करता है और सरकार से अपील करता है कि उनके परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने में कोई कोर-कसर न छोड़ी जाए।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


