
भागलपुर/नाथनगर | 27 फरवरी, 2026: कहते हैं ‘जाको राखे साइयां, मार सके न कोय’—इस कहावत को आज नाथनगर रेलवे स्टेशन पर रेल सुरक्षा बल (RPF) के जवानों ने सच कर दिखाया। साहिबगंज-जमालपुर पैसेंजर ट्रेन के एक कोच में लावारिस हालत में छोड़े गए एक नवजात मासूम के लिए आरपीएफ कर्मी फरिश्ता बनकर आए और समय रहते उसकी जान बचा ली।
ट्रेन के बाथरूम के पास लावारिस था मासूम
घटना गाड़ी संख्या 63431 (साहिबगंज-जमालपुर पैसेंजर) की है। ट्रेन जैसे ही नाथनगर स्टेशन पर रुकी, नियमित गश्त और सुरक्षा जांच के दौरान आरपीएफ जवानों की नजर बाथरूम के समीप पड़े एक कपड़े के गट्ठर पर पड़ी। पास जाने पर पता चला कि उसमें एक जीवित नवजात शिशु लिपटा हुआ है।
RPF के ‘फरिश्ते’: राजेश और शैलेंद्र की तत्परता
ड्यूटी पर तैनात हेड कांस्टेबल राजेश कुमार और कांस्टेबल शैलेंद्र कुमार ने बिना एक पल गंवाए मासूम को अपने संरक्षण में लिया। शोर-शराबे और भीड़ के बीच घबराए हुए बच्चे को आरपीएफ पोस्ट लाया गया, जहाँ उसे प्राथमिक देखभाल और गर्माहट दी गई।
चाइल्ड लाइन को सौंपा गया जिम्मा
आरपीएफ अधिकारियों ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए तुरंत चाइल्ड लाइन को सूचित किया।
- वर्तमान स्थिति: शिशु पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ बताया जा रहा है। उसे आगे की देखभाल और पुनर्वास के लिए चाइल्ड लाइन के विशेषज्ञों को सौंप दिया गया है।
- जांच: रेल पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज और यात्रियों से पूछताछ के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वह ‘निर्मोही’ कौन था, जो कड़ाके की ठंड और असुरक्षित माहौल में मासूम को ट्रेन में छोड़ गया।
VOB का नजरिया: खाकी का मानवीय चेहरा
अक्सर सुरक्षा और जांच के लिए जानी जाने वाली आरपीएफ का यह मानवीय रूप समाज में एक सकारात्मक संदेश देता है। रेल पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई की स्थानीय लोगों और यात्रियों ने जमकर सराहना की है। एक मासूम, जिसे अपनों ने ठुकरा दिया था, उसे सिस्टम और मानवता ने मिलकर नई उम्मीद दी है।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


