
बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। विधानसभा चुनाव में शिकस्त के बाद तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए यात्रा पर निकलने की तैयारी में हैं। खास बात यह है कि तेजप्रताप के ऐलान के बाद तेजस्वी ने भी राज्यव्यापी यात्रा की घोषणा कर दी है।
संगठन विस्तार बनाम नई राजनीतिक पहचान
राष्ट्रीय जनता दल में कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद तेजस्वी यादव एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। पार्टी संगठन के विस्तार और चुनावी रणनीति को धार देने के उद्देश्य से वे होली के बाद बिहार यात्रा पर निकलेंगे।
दूसरी ओर, तेज प्रताप यादव अपनी नई पार्टी जनशक्ति जनता दल को मजबूत करने के लिए पूरे बिहार का दौरा करेंगे। उन्होंने पटना में पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक कर यात्रा की रूपरेखा भी तैयार कर ली है।
100 दिन बाद सरकार से ‘हिसाब’
तेजस्वी यादव ने चुनाव के बाद कहा था कि वे सरकार को 100 दिन का समय देंगे। अब जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के 100 दिन पूरे हो चुके हैं, तो तेजस्वी जनता के बीच जाकर चुनावी वादों का हिसाब लेने की बात कह रहे हैं।
आरजेडी प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि सरकार जनता से किए वादों को पूरा करने में नाकाम रही है और नेता प्रतिपक्ष अब जनता के बीच जाकर सरकार को बेनकाब करेंगे।
विरासत की लड़ाई या रणनीतिक राजनीति?
राजनीतिक विश्लेषक कौशलेन्द्र प्रियदर्शी का मानना है कि दोनों भाई अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का दावा कर रहे हैं। तेजप्रताप की यात्रा घोषणा ने तेजस्वी के लिए चुनौती खड़ी कर दी है।
तेजस्वी जहां बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर सरकार को घेरते रहे हैं, वहीं तेजप्रताप अपनी अलग शैली और जनसंपर्क कार्यक्रमों के जरिए युवाओं और धार्मिक-सांस्कृतिक मंचों पर सक्रिय हैं।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि बिहार की राजनीति में ‘लालू के तेज’ में से कौन अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत कर पाता है।


