लखनऊ का ‘कसाई बेटा’: 50 लाख की सनक और एक थप्पड़ का खौफनाक इंतकाम; पिता के शव के टुकड़े कर ड्रम में छिपाया, 3 दिन तक घर में बहन के साथ रहा सामान्य

लखनऊ/आशियाना | 26 फरवरी, 2026: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के आशियाना इलाके में ‘वर्धमान पैथोलॉजी’ के मालिक मानवेंद्र सिंह की हत्या की कहानी किसी भी इंसान की रूह कंपा देने के लिए काफी है। जिस बेटे को पिता ने डॉक्टर बनाने का सपना देखा था, उसी ने कसाई बनकर पिता के शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। पुलिस की चार्जशीट और पूछताछ में जो बातें सामने आई हैं, वे रिश्तों के कत्ल की एक ऐसी दास्तां बयां करती हैं जो नफरत, लालच और सनक से भरी है।

विवाद की पटकथा: 50 लाख रुपये और पिता का थप्पड़

​हत्या से एक दिन पहले, यानी 19 फरवरी को घर में भारी बवाल हुआ था।

  • लापता रकम: मानवेंद्र सिंह ने शराब के ठेकों के नवीनीकरण के लिए घर में 50 लाख रुपये नकद रखे थे। जब उन्होंने पैसे गिने, तो उसमें से बड़ी रकम कम मिली。
  • शक की सुई: अक्षत (21 वर्ष) पहले भी घर से ब्रेसलेट और अंगूठी चोरी कर चुका था, इसलिए पिता का सीधा शक उस पर गया।
  • चरम पर विवाद: बहस इतनी बढ़ गई कि मानवेंद्र ने गुस्से में अक्षत को थप्पड़ जड़ दिया और अपनी लाइसेंसी राइफल उस पर तान दी। अपमान का यह घूंट अक्षत पी तो गया, लेकिन उसके दिमाग में कत्ल का जुनून सवार हो गया。

वारदात: तड़के 4:30 बजे ‘साइलेंट किलर’ का प्रहार

​20 फरवरी की सुबह, जब मानवेंद्र सिंह गहरी नींद में थे, अक्षत ने खौफनाक साजिश को अंजाम दिया:

  1. हत्या: अक्षत ने पिता की ही लाइसेंसी राइफल उठाई और उनके सिर में गोली मार दी।
  2. क्रूरता की हद: हत्या के बाद उसने बाजार से दो आरी, दो चाकू और एक नीला प्लास्टिक ड्रम खरीदा。
  3. शव का अंग-भंग: उसने आरी से पिता के हाथ और पैर काट दिए। शरीर के इन हिस्सों को पॉलिथीन में लपेटकर वह अपनी कार से 21 किलोमीटर दूर नादरगंज नहर के पास फेंक आया。
  4. धड़ को छिपाया: शरीर के बाकी हिस्से (धड़) को उसने नीले ड्रम में भरा और घर के ग्राउंड फ्लोर पर छिपा दिया। सबूत मिटाने के लिए वह 20 लीटर तारपिन का तेल भी लाया था ताकि बाकी शव को जला सके。

बहन का ‘मौन’ और 3 दिन का खौफनाक ड्रामा

​इस हत्याकांड का सबसे विचलित करने वाला हिस्सा यह है कि अक्षत की बहन कृति को सब पता था।

  • खामोश गवाह: कृति ने गोली की आवाज सुनी थी और पिता को खून से लथपथ देखा था। लेकिन अक्षत के यह कहने पर कि “माँ पहले ही नहीं है, अगर मैं जेल गया तो तुम्हारा क्या होगा?”, वह चुप रह गई。
  • सामान्य दिनचर्या: अगले 3 दिनों तक घर में पिता का कटा हुआ धड़ मौजूद रहा, लेकिन भाई-बहन सामान्य व्यवहार करते रहे। कृति अपनी परीक्षा देने स्कूल जाती रही और अक्षत ने खुद थाने जाकर पिता की ‘गुमशुदगी’ की झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई。

पुलिस की जांच और अनसुलझे रहस्य

​पुलिस को शक तब हुआ जब अक्षत के बयानों में विरोधाभास मिला। कड़ाई से पूछताछ करने पर वह टूट गया और अपनी निशानदेही पर शव के टुकड़े बरामद करवाए。

जांच के घेरे में अन्य तथ्य:

  • माँ की मौत: 10 साल पहले अक्षत की माँ की मौत भी संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी, जिसे अब दोबारा जांच के दायरे में लिया जा सकता है。
  • वित्तीय ट्रांजेक्शन: हत्या के आसपास बैंक खातों से बड़ी रकम का लेन-देन हुआ है, जिससे यह अंदेशा है कि इसमें कोई बाहरी व्यक्ति भी शामिल हो सकता है。
  • नशे की लत: अक्षत को नशे की लत थी और वह अपनी ‘गर्लफ्रेंड’ पर लाखों रुपये उड़ा रहा था, जिससे पिता काफी परेशान थे。

VOB का नजरिया: क्या हम ‘राक्षस’ पाल रहे हैं?

​लखनऊ की यह घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि हमारे समाज के लिए चेतावनी है। जहाँ भौतिक सुख-सुविधाओं और नशे की लत के सामने खून के रिश्ते पानी हो गए। 21 साल का एक युवा, जो मेडिकल की तैयारी कर रहा था, उसका इतना प्रोफेशनल तरीके से शव को ठिकाने लगाना यह दर्शाता है कि वह मानसिक रूप से अपराधी बन चुका था। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ समाज से अपील करता है कि बच्चों की गतिविधियों और उनकी संगत पर नजर रखें, ताकि किसी और का घर इस तरह न उजड़े।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।

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