भागलपुर: बिहार सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) नीति के तहत पीरपैंती (भागलपुर) के सेवानिवृत्त प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) चंद्रशेखर झा की 100% पेंशन स्थायी रूप से रोकने का फैसला किया है। यह कार्रवाई करोड़ों रुपये के सृजन घोटाले और पद के दुरुपयोग के आरोपों के बाद की गई है।
सृजन घोटाले का मामला
चंद्रशेखर झा पर आरोप है कि उन्होंने पीरपैंती में पदस्थापन के दौरान सरकारी राशि ₹4,52,88,246 की अवैध निकासी की और इसे ‘सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड’ के खातों में ट्रांसफर किया। CBI जांच में यह भी खुलासा हुआ कि इस धन का इस्तेमाल उन्होंने अपनी पत्नी बबीता झा के नाम पर गाजियाबाद के वसुंधरा में फ्लैट बुक कराने में किया।
पेंशन रोकने का आधार
सरकार ने बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-139 के तहत पेंशन रोकने का निर्णय लिया। विभाग ने कहा कि यदि किसी अधिकारी के विरुद्ध कार्यकाल में ‘गंभीर कदाचार’ के पर्याप्त प्रमाण मिलते हैं, तो सरकार उनकी पेंशन रोक सकती है।
अधिकारी का विवादित रिकॉर्ड
चंद्रशेखर झा का पहले से ही विवादित रिकॉर्ड रहा है। रोहतास में जिला प्रबंधक (राज्य खाद्य निगम) के पद पर रहते हुए उन्हें आदेशों की अवहेलना और विभाग को आर्थिक क्षति पहुंचाने के कारण निंदा और वेतन कटौती का सामना करना पड़ा था।
पुनर्विचार याचिका खारिज
झा ने 19 जनवरी 2026 को पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी, लेकिन सरकार ने 24 फरवरी 2026 को स्पष्ट किया कि उन्होंने कोई नया तथ्य या गबन न करने का साक्ष्य पेश नहीं किया। परिणामस्वरूप उनकी याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया गया।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश
अवर सचिव उमेश प्रसाद द्वारा जारी आदेश के बाद अब चंद्रशेखर झा को एक भी पैसा पेंशन के रूप में नहीं मिलेगा। आदेश की प्रति महालेखाकार और CBI के डीआईजी को भी भेज दी गई है। यह कदम बिहार प्रशासनिक तंत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा संदेश माना जा रहा है।


