मुजफ्फरपुर | 26 फरवरी, 2026: मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र में बुधवार की रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक निलंबित पुलिसकर्मी ने सरेआम ‘गुंडागर्दी’ का परिचय दिया। शहर के सोडा गोदाम चौक इलाके में एक निलंबित सब-इंस्पेक्टर (SI) पर अधिवक्ता के पैतृक आवास को जबरन खाली कराने और विरोध करने पर पिस्टल दिखाकर जान से मारने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगा है。
आधी रात का ‘हाई-वोल्टेज’ ड्रामा: निजी गाड़ी से पहुँचा ‘निलंबित’ साहब
घटना बुधवार रात करीब 8:30 बजे की है。
- दबंगई: अधिवक्ता विजय प्रसाद और राजू कुमार के घर पर निलंबित एसआई सुजीत कुमार अपनी निजी गाड़ी से पहुँचा。
- जबरन एंट्री: आरोप है कि सुजीत कुमार ने बिना किसी अनुमति के घर में प्रवेश किया और गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी。
- पिस्टल का डर: जब स्थानीय लोग विरोध में जुटे, तो आरोपी पुलिसकर्मी ने अपनी पिस्टल निकाल ली और भीड़ पर कार्रवाई करने की धमकी देने लगा。 हालांकि, लोगों का आक्रोश बढ़ते देख वह मौके से फरार हो गया。
अधिवक्ता का पक्ष: “अदालती मामले में पुलिसिया धौंस”
पीड़ित राजू कुमार ने बताया कि उनके घर का मामला काफी समय से न्यायालय में लंबित है。
- पुराना विवाद: आरोपी एसआई पहले भी बिना किसी आदेश के पीड़ित के घर में सीसीटीवी कैमरा लगवा चुका था, जिसकी शिकायत पहले ही वरीय अधिकारियों से की जा चुकी है。
- रौब: सुजीत कुमार वर्तमान में ब्रह्मपुरा थाना से ही निलंबित है, फिर भी वह पुलिस का रौब दिखाकर घर खाली करने का दबाव बना रहा था。
पुलिसिया जांच: “किराए पर मकान लेने गए थे दारोगा जी”
मामले की गंभीरता को देखते हुए सिटी एसपी ने जांच के आदेश दिए हैं। हालांकि, पुलिस की प्रारंभिक जांच में एक अलग ही कहानी सामने आई है:
- किराएदार का तर्क: पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, निलंबित दारोगा वहां मकान किराए पर लेने की बात करने गए थे。
- वीडियो साक्ष्य: सिटी एसपी मो. मोहिबुल्लाह अंसारी ने बताया कि घटना का एक वीडियो मिला है जिसमें बातचीत तो दिख रही है, लेकिन फिलहाल पिस्टल निकालने की बात स्पष्ट नहीं हुई है。
- कार्रवाई का आश्वासन: पुलिस ने पीड़ित से लिखित आवेदन मांगा है और सभी बिंदुओं पर जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी。
VOB का नजरिया: वर्दी उतरने के बाद भी ‘रौब’ क्यों?
मुजफ्फरपुर की यह घटना पुलिस विभाग के अनुशासन पर सवाल खड़ा करती है। सवाल यह है कि अगर मामला कोर्ट में है, तो एक निलंबित अधिकारी को रात के समय किसी के निजी आवास में घुसने की इजाजत किसने दी? क्या ‘किराए पर मकान’ देखने के लिए रात के साढ़े आठ बजे का समय और बहस का तरीका जायज था? अगर वीडियो में बातचीत की पुष्टि हो रही है, तो प्रशासन को निष्पक्ष जांच कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है, चाहे वह वर्दी में हो या निलंबन में।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


