पटना/बोधगया | 26 फरवरी, 2026: गया का तिलकुट तो दुनिया भर में मशहूर है, लेकिन अब अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन नगरी बोधगया में ‘नीरा’ से बने व्यंजनों ने एक नई क्रांति ला दी है। महाबोधि मंदिर के पास ‘आकाश जीविका’ द्वारा संचालित स्टॉल इन दिनों देसी और विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहाँ चीनी या साधारण गुड़ के बजाय नीरा से तैयार किए गए गुड़ के तिलकुट, अनरसा, लाई और चाय का स्वाद लोगों की जुबान पर चढ़ रहा है।
मजदूरी छोड़ी, अब खुद बने मालिक: डब्ल्यू कुमार की प्रेरणादायी कहानी
इस सफलता की कहानी के पीछे बोधगया के इलरा गांव निवासी डब्ल्यू कुमार की कड़ी मेहनत है।
- प्रवासी मजदूर से उद्यमी: पहले डब्ल्यू कुमार दूसरे राज्यों में दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार पालते थे।
- परिवर्तन का आधार: बिहार में शराबबंदी के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा नीरा के उत्पादन को दिए गए बढ़ावा ने उनकी जिंदगी बदल दी।
- पारिवारिक रोजगार: शुरुआत में उन्होंने अकेले यह काम शुरू किया था, लेकिन अब उनकी पत्नी सहित परिवार के सभी सदस्यों को घर पर ही सम्मानजनक रोजगार मिल गया है।
सेहत और स्वाद का संगम: डायबिटीज मरीजों की पहली पसंद
नीरा से बने उत्पादों की सबसे बड़ी खूबी उनका स्वास्थ्यवर्धक होना है।
- कम मीठा: नीरा के गुड़ से बना तिलकुट पारंपरिक तिलकुट के मुकाबले कम मीठा होता है।
- डायबिटीज फ्रेंडली: कम मीठा होने के कारण मधुमेह (डायबिटीज) से पीड़ित लोग भी इसका स्वाद बेझिझक ले रहे हैं।
- शुद्धता: डब्ल्यू कुमार के अनुसार, वह नीरा से खुद गुड़ तैयार करते हैं और उसी से पेड़ा, लाई और लड्डू जैसी मिठाइयां बनाते हैं।
नीतीश सरकार का साथ और बाजार की रफ्तार
डब्ल्यू कुमार के हुनर को सरकार का भी भरपूर समर्थन मिला है।
- विशेष काउंटर: मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला प्रशासन ने बोधगया और गया में विशेष काउंटर उपलब्ध कराए हैं।
- बिक्री के आंकड़े: तिलकुट के सीजन में प्रतिदिन 150 किलोग्राम से अधिक की बिक्री दर्ज की जा रही है।
- कीमतों का अंतर: जहाँ सामान्य तिलकुट ₹360-380 प्रति किलो बिकता है, वहीं नीरा तिलकुट की कीमत ₹400-410 प्रति किलो है।
- कच्चा माल: इस वर्ष एक लाख लीटर से अधिक नीरा से गुड़ तैयार किया गया है।
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उत्पाद |
खासियत |
लोकप्रियता |
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नीरा तिलकुट |
कम मीठा, नीरा गुड़ से निर्मित |
विदेशी पर्यटक और डायबिटीज मरीज |
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नीरा चाय |
अनोखा स्वाद, स्फूर्तिदायक |
स्टॉल पर आने वाले नियमित ग्राहक |
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नीरा अनरसा/लाई |
पारंपरिक विधि, नीरा का बेस |
स्थानीय और घरेलू पर्यटक |
VOB का नजरिया: गांवों की बदलती अर्थव्यवस्था
नीरा से बनी मिठाइयां केवल स्वाद का विषय नहीं हैं, बल्कि यह इस बात का प्रमाण हैं कि सरकारी नीतियों को अगर सही विजन के साथ जमीन पर उतारा जाए, तो पलायन रुक सकता है। डब्ल्यू कुमार का मॉडल दिखाता है कि स्थानीय संसाधनों (जैसे ताड़ के पेड़ और नीरा) का सही इस्तेमाल कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कैसे आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। खास तौर पर बोधगया जैसे अंतर्राष्ट्रीय मंच पर इन उत्पादों की ब्रांडिंग बिहार की एक नई और प्रगतिशील छवि पेश कर रही है।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


