भागलपुर | 25 फरवरी, 2026 भागलपुर में सड़क सुरक्षा के दावों की पोल खुल गई है। कभी राज्य में टॉप-3 में रहने वाला भागलपुर अब सड़क हादसों के डेटा प्रबंधन में पिछड़कर 11वें स्थान पर आ गया है। बुधवार को समीक्षा भवन में जिलाधिकारी डॉक्टर नवल किशोर चौधरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में पुलिस और परिवहन विभाग के बीच समन्वय की कमी साफ दिखी। जहाँ 260 पीड़ित परिवार मुआवजे के लिए थानों के चक्कर काट रहे हैं, वहीं प्रशासन ने घायलों के लिए ₹1.5 लाख तक के मुफ्त इलाज की एक नई उम्मीद भी जगाई है।
रैंकिंग में गिरावट: क्यों फिसला भागलपुर?
जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) जनार्दन प्रसाद सिंह ने बैठक में बेहद कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने बताया कि iRAD (एकीकृत सड़क दुर्घटना डेटाबेस) पोर्टल पर दुर्घटनाओं की प्रविष्टि (Data Entry) की रफ्तार सुस्त होने की वजह से जिले की रैंकिंग में भारी गिरावट आई है।
- लापरवाही की मार: भागलपुर पहले राज्य में तीसरे स्थान पर था, जो अब 11वें पायदान पर पहुँच गया है।
- पुलिस को अल्टीमेटम: सड़क हादसों का डेटा समय पर फीड न करने से न केवल रैंकिंग गिर रही है, बल्कि भविष्य की सुरक्षा योजनाओं के लिए सही विश्लेषण भी नहीं हो पा रहा है। डीएम ने वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) से इस मामले में थानों को कड़े निर्देश देने को कहा है।
मुआवजे पर ‘C4’ का ग्रहण: 260 परिवारों का हक अटका
बैठक में ‘हिट एंड रन’ (Hit and Run) के मामलों की समीक्षा में एक दर्दनाक सच सामने आया। जिले में 260 ऐसे मामले हैं जहाँ पीड़ितों को अब तक मुआवजा नहीं मिल सका है।
- थानों की सुस्ती: इन मामलों में मुआवजा तभी मिलता है जब संबंधित थाना C4 रिपोर्ट जिला परिवहन कार्यालय को भेजता है।
- पीड़ितों का दर्द: थानों से रिपोर्ट न आने के कारण मुआवजा फाइलें दफ्तरों की धूल फांक रही हैं। डीएम ने नाराजगी जाहिर करते हुए सभी थानों से लंबित C4 रिपोर्ट अविलंब उपलब्ध कराने का आदेश दिया है ताकि गरीबों को उनका हक मिल सके।
बड़ी राहत: ₹1.5 लाख तक का ‘कैशलेस’ इलाज
इस निराशाजनक रिपोर्ट के बीच एक बड़ी खुशखबरी भी आई। अब सड़क हादसे के शिकार लोगों को अस्पताल के खर्च की चिंता नहीं करनी होगी।
- तत्काल इलाज: ‘हिट एंड रन’ के शिकार व्यक्ति का ₹1.5 लाख तक का इलाज अब कैशलेस होगा।
- निबंधित अस्पताल: यह सुविधा आयुष्मान भारत के तहत निबंधित सभी प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों में मिलेगी।
- 7 दिन में भुगतान: सबसे अहम बात यह है कि अस्पताल के बिल का भुगतान जिलाधिकारी द्वारा एक सप्ताह के भीतर सीधे अस्पताल को कर दिया जाएगा। इससे घायलों को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना या कर्ज नहीं लेना पड़ेगा।
प्रशासनिक सख्ती: कागजों से बाहर निकले अफसर
जिलाधिकारी डॉक्टर नवल किशोर चौधरी ने स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह इंसानी जानों से जुड़ा मामला है।
“मुआवजे की फाइलें थानों में नहीं रुकनी चाहिए। साथ ही, कैशलेस इलाज की सुविधा का लाभ हर उस व्यक्ति को मिलना चाहिए जो सड़क हादसे का शिकार हुआ है। लापरवाही बरतने वाले पदाधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।” — डीएम, भागलपुर
VOB का नजरिया: क्या सिर्फ मुआवजा काफी है?
रैंकिंग का गिरना बताता है कि सिस्टम डिजिटल रिपोर्टिंग को लेकर गंभीर नहीं है। 260 परिवारों का मुआवजा अटकना सिस्टम की विफलता है। हालांकि, ₹1.5 लाख का कैशलेस इलाज एक क्रांतिकारी कदम है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अस्पताल और थाना स्तर पर कागजी कार्यवाही कितनी तेज होती है।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


