सावधान! ‘बच्चा चोरी’ की अफवाह बना सकती है आपको अपराधी; बिहार में 2 दिन में 5 शिकायतें और सब निकलीं झूठी: ADG की चेतावनी

पटना | 25 फरवरी, 2026: बिहार में इन दिनों ‘बच्चा चोरी’ की अफवाहें जंगल की आग की तरह फैल रही हैं, जो न केवल समाज में डर पैदा कर रही हैं बल्कि निर्दोषों की जान के लिए भी खतरा बन गई हैं। पटना के पटेल भवन में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान अपर पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग) अमित कुमार जैन ने आम लोगों से भावुक अपील की है कि वे इन अफवाहों पर ध्यान न दें और कानून को अपने हाथ में लेने की गलती न करें।

2 दिन, 5 शिकायतें और ‘जीरो’ सच्चाई

​ADG अमित कुमार जैन ने बताया कि पिछले 48 घंटों में राज्य के विभिन्न जिलों से बच्चा चोरी की 5 प्रमुख शिकायतें मिली थीं:

  • जमुई: 1 मामला
  • पूर्णिया: 1 मामला
  • नालंदा: 1 मामला
  • मुजफ्फरपुर: 2 मामले

​बिहार पुलिस मुख्यालय ने जब इन सभी मामलों की गहनता से जांच कराई, तो चौंकाने वाली बात सामने आई कि एक भी मामला सही नहीं था। ये सभी महज अफवाहें थीं जिन्हें सोशल मीडिया या आपसी बातचीत के जरिए हवा दी गई थी।

भीड़ का इंसाफ या ‘मॉब लिंचिंग’ की साजिश?

​एडीजी ने चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी अफवाहें तेजी से फैलती हैं और देखते ही देखते भीड़ जमा हो जाती है। यह स्थिति ‘मॉब लिंचिंग’ का रूप ले लेती है, जिसमें अक्सर मानसिक रूप से कमजोर या अनजान निर्दोष व्यक्ति भीड़ की बर्बरता का शिकार हो जाते हैं।

​”कानून को अपने हाथ में लेना खुद एक बड़ा अपराध है। अगर आपको किसी पर शक हो, तो खुद ‘जज’ न बनें। तुरंत डायल 112 या अपने स्थानीय थाने को सूचित करें।” — अमित कुमार जैन, ADG

आंकड़ों की जुबानी: 2025 में गुमशुदगी की भयावह तस्वीर

​प्रेस वार्ता के दौरान पुलिस मुख्यालय ने वर्ष 2025 के गुमशुदगी के आधिकारिक आंकड़े भी साझा किए, जो काफी चिंताजनक हैं:

श्रेणी

कुल मामले (2025)

बरामद किए गए

अभी भी लापता

बालिकाएं

12,526

बालक

2,173

कुल योग

14,699

7,772

6,927

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि बड़ी संख्या में बच्चे लापता होते हैं, लेकिन पुलिस की सक्रियता से 50% से अधिक बच्चों को सुरक्षित बरामद भी किया गया है।

पुलिस की SOP: अब 24 घंटे में दर्ज होगा केस

​गुमशुदा बच्चों की बरामदगी के लिए बिहार पुलिस ने अपनी कार्यप्रणाली (SOP) को और सख्त कर दिया है:

  1. 24 घंटे की डेडलाइन: यदि कोई बच्चा 24 घंटे तक लापता रहता है, तो पुलिस के लिए प्राथमिकी (FIR) दर्ज करना अनिवार्य है।
  2. AHTU को ट्रांसफर: अगर बच्चा 4 महीने तक नहीं मिलता, तो मामला एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) को सौंप दिया जाता है।
  3. वात्सल्य पोर्टल: बिहार के सभी थाने भारत सरकार के ‘वात्सल्य पोर्टल’ से जुड़े हैं। यदि बिहार का बच्चा किसी दूसरे राज्य में मिलता है, तो इस पोर्टल के जरिए तुरंत जानकारी साझा हो जाती है।

VOB का नजरिया: सोशल मीडिया पर ‘फॉरवर्ड’ करने से पहले सोचें

​अफवाहें तभी मरती हैं जब हम उन्हें फैलाना बंद कर देते हैं। एक गलत मैसेज किसी की जान ले सकता है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ आपसे अपील करता है कि बिना पुष्टि के किसी भी ‘बच्चा चोरी’ के वीडियो या मैसेज को शेयर न करें। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें और पुलिस का सहयोग करें।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।

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