भागलपुर में ‘मौत की दुकान’ पर सर्जिकल स्ट्राइक: भीखनपुर का अवैध क्लिनिक सील; मरीजों को दी जा रही थीं एक्सपायर दवाएं, हड़कंप

भागलपुर | 25 फरवरी, 2026: रेशमी शहर भागलपुर में स्वास्थ्य विभाग ने ‘झोलाछाप’ और अवैध क्लिनिक संचालकों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को भीखनपुर इलाके में लंबे समय से मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे एक अवैध क्लिनिक पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई की। जांच में जो कड़वा सच सामने आया, उसने अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए— यहाँ न केवल बिना लाइसेंस के इलाज हो रहा था, बल्कि मरीजों को एक्सपायर (समय सीमा समाप्त) दवाएं तक दी जा रही थीं।

भीखनपुर में ‘अंधेरगर्दी’: स्वास्थ्य विभाग की रेड से मची खलबली

​सदर अस्पताल के प्रभारी डॉ. राजू कुमार और अस्पताल प्रबंधक आशुतोष कुमार के नेतृत्व में टीम जब भीखनपुर के इस संदिग्ध क्लिनिक पहुँची, तो वहां अफरा-तफरी मच गई।

  • छापेमारी की वजह: विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि बिना किसी वैध डिग्री और पंजीकरण के यह केंद्र मरीजों को भर्ती कर रहा है।
  • गंभीर लापरवाही: जांच के दौरान दवाइयों के स्टॉक को खंगाला गया, जहाँ भारी मात्रा में ऐसी दवाएं मिलीं जिनकी ‘एक्सपायरी डेट’ काफी पहले निकल चुकी थी।

पर्चियों पर ‘डॉक्टरों’ का जाल, धरातल पर बड़ा ‘धोखा’

​जांच टीम को छापेमारी के दौरान ‘मां दुर्गा पॉली क्लिनिक’ के नाम की प्रिस्क्रिप्शन पैड (पर्चियां) और दस्तावेज बरामद हुए। इन पर्चियों पर तीन डॉक्टरों के नाम प्रमुखता से अंकित थे:

  1. डॉ. प्रीति कुमारी
  2. डॉ. नीतीश कुमार
  3. डॉ. अरविंद कुमार

​अधिकारी अब इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि क्या ये डॉक्टर वाकई वहां सेवाएं दे रहे थे या उनके नाम का सहारा लेकर मरीजों को गुमराह किया जा रहा था। टीम ने मौके से मरीजों का एंट्री रजिस्टर भी जब्त कर लिया है, जिसमें दर्ज आंकड़े इलाज के नाम पर हो रहे खेल की गवाही दे रहे हैं।

तत्काल एक्शन: क्लिनिक सील, कानूनी कार्रवाई की तैयारी

​मौके पर ही गंभीर अनियमितताएं और एक्सपायर दवाएं मिलने के बाद डॉ. राजू कुमार ने बिना किसी देरी के क्लिनिक को तत्कल प्रभाव से सील कर दिया है।

​”मरीजों की जान के साथ इस तरह का खिलवाड़ जघन्य अपराध है। एक्सपायर दवाएं जहर के समान हैं। जिले में ऐसे जितने भी अवैध केंद्र चल रहे हैं, उन सबका यही हश्र होगा। यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।”

डॉ. राजू कुमार, प्रभारी, सदर अस्पताल

 

VOB का नजरिया: क्या केवल ‘सील’ करना ही काफी है?

​भागलपुर के भीखनपुर में हुई यह कार्रवाई स्वागत योग्य है, लेकिन यह सवाल भी खड़ा करती है कि आखिर इतने लंबे समय से यह अवैध कारोबार प्रशासन की नाक के नीचे कैसे फल-फूल रहा था?

  • सावधानी: शहर के गली-कूचों में ऐसे कई ‘पॉली क्लिनिक’ खुले हुए हैं जहाँ न तो कोई मानक है और न ही प्रशिक्षित स्टाफ।
  • अपील: ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ पाठकों से अपील करता है कि इलाज से पहले क्लिनिक का पंजीकरण और डॉक्टर की डिग्री जरूर जांचें। सस्ते के चक्कर में अपनी जान जोखिम में न डालें।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।

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