PK का ‘समस्तीपुर शंखनाद’: “हिम्मत है तो पूरे देश में लागू करें शराबबंदी”; मांस के नए नियमों पर सरकार को घेरा, उठाए गंभीर सवाल

रोसड़ा (समस्तीपुर) | 25 फरवरी, 2026: जन सुराज के सूत्रधार और ‘बिहार नवनिर्माण अभियान’ के नायक प्रशांत किशोर (PK) आज समस्तीपुर के रोसड़ा पहुँचे। यहाँ संगठन की मजबूती और जनता की आवाज़ को बुलंद करने के उद्देश्य से उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ गहन मंथन किया। मीडिया ब्रीफिंग के दौरान पीके अपने पुराने अंदाज़ में दिखे और उन्होंने नीतीश सरकार की शराबबंदी से लेकर मांस बिक्री के नए नियमों तक पर चुन-चुनकर प्रहार किए।

शराबबंदी पर सीधी चुनौती: “सिर्फ बिहार को ही ‘फायदा’ क्यों?”

​प्रशांत किशोर ने शराबबंदी कानून को लेकर एनडीए (NDA) सरकार पर तंज कसते हुए इसे ‘दोगलापन’ करार दिया। उन्होंने कहा:

​”अगर शराबबंदी कानून से बिहार की महिलाओं को वाकई इतना बड़ा फायदा मिल रहा है और यह इतनी ही सफल है, तो एनडीए इसे पूरे देश में लागू क्यों नहीं करती? क्या प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी नहीं चाहते कि देश की अन्य महिलाओं को भी यह ‘फायदा’ मिले? आखिर सिर्फ बिहार के लोग ही इस कथित ‘फायदे’ के हकदार क्यों हैं?”

 

​पीके ने आगे कहा कि बिहार में शराबबंदी के नाम पर केवल होम डिलीवरी का अवैध धंधा फल-फूल रहा है, जिससे राजस्व का नुकसान और अपराधियों का विकास हो रहा है।

मांस बिक्री नियम पर प्रहार: “समाज को बांटने की नई साजिश”

​हाल ही में बिहार सरकार (डिप्टी सीएम विजय सिन्हा) द्वारा स्कूलों और धार्मिक स्थलों के पास मांस-मछली की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध और “बच्चों में हिंसक प्रवृत्ति” वाले बयान पर पीके ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा:

  • असली मुद्दे गायब: “ये लोग शिक्षा, पलायन, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसे बुनियादी मुद्दों पर बात नहीं करेंगे। इन विषयों पर इनके पास कोई जवाब नहीं है।”
  • बंटवारे की राजनीति: “यह नया नियम केवल समाज को जाति और धर्म के नाम पर बांटने और लोगों को आपस में लड़ाने का एक और जरिया है।”
  • डायवर्जन टैक्टिक: पीके के अनुसार, जब सरकार अपनी विफलताओं को छिपाना चाहती है, तो वह खान-पान और धार्मिक भावनाओं के पीछे छिपने की कोशिश करती है।

बिहार नवनिर्माण: जनता की आवाज बनेगा जन सुराज

​रोसड़ा संगठन जिले में साथियों से चर्चा करते हुए प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया कि ‘बिहार नवनिर्माण अभियान’ का एकमात्र लक्ष्य बिहार को उसकी वर्तमान दुर्दशा से बाहर निकालना है। उन्होंने कहा कि यह अभियान किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि उन करोड़ों बिहारियों का है जो बदलाव चाहते हैं।

द वॉयस ऑफ बिहार का नजरिया: प्रशांत किशोर का समस्तीपुर दौरा यह साफ कर रहा है कि वे अब सरकार को घेरने का कोई भी मौका नहीं छोड़ेंगे। शराबबंदी पर उनका ‘नेशनल चैलेंज’ और मांस नियमों पर ‘शिक्षा-पलायन’ वाला काउंटर अटैक, बिहार की राजनीति में नए ध्रुवीकरण का संकेत है।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।

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