पटना | 25 फरवरी, 2026: बिहार के ग्रामीण इलाकों में अब बैंकिंग के लिए कोसों दूर पैदल चलने या बैंक की कतारों में खड़े होने का झंझट खत्म होने वाला है। मंगलवार को पटना के ‘कौटिल्या पनाश’ होटल में बिहार की दो बड़ी सहकारी संस्थाओं—बिहार स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक (BSCB) और कॉम्फेड (COMFED/Sudha) के बीच एक ऐतिहासिक समझौता (MOA) हुआ। अब गांव-गांव में फैली प्राथमिक दुग्ध सहकारी समितियां (PDCS) न केवल दूध का कलेक्शन करेंगी, बल्कि एक ‘मिनी बैंक’ के रूप में भी काम करेंगी।
‘सहकारिता में सहकार’: अब सुधा बूथ पर ही निकलेगा कैश
भारत सरकार की ‘सहकारिता से समृद्धि’ की तर्ज पर बिहार में “सहकारिता में सहकार” पहल शुरू की गई है। इस समझौते के तहत दुग्ध समितियों को ‘बैंक मित्र’ (DMA) के रूप में विकसित किया जाएगा।
- माइक्रो एटीएम की सुविधा: अब किसान अपनी ही समिति में जाकर माइक्रो एटीएम के जरिए नकद निकासी और जमा कर सकेंगे।
- क्या-क्या मिलेंगी सुविधाएं: नकद जमा/निकासी के अलावा, नया खाता खोलना, बैलेंस चेक करना, डिजिटल ट्रांजेक्शन, ऋण (Loan) और बीमा (Insurance) जैसी सुविधाएं अब दूध केंद्रों पर ही उपलब्ध होंगी।
किसानों और महिलाओं के लिए ‘डोर-स्टेप बैंकिंग’
बैंक के अध्यक्ष श्री रमेश चन्द्र चौबे ने बताया कि इस पहल का सबसे बड़ा फायदा उन महिलाओं और पशुपालकों को होगा जिन्हें छोटे-छोटे बैंकिंग कामों के लिए शहर जाना पड़ता था। अब उनका समय और किराया दोनों बचेगा। कॉम्फेड का जो व्यापक ग्रामीण नेटवर्क है, वह अब वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) का सबसे बड़ा हथियार बनेगा।
मंत्रियों का विजन: बढ़ेगी पशुपालकों की आय
कार्यक्रम में दो विभागों के मंत्रियों की मौजूदगी ने इस समझौते की अहमियत को और बढ़ा दिया:
- सहकारिता मंत्री डा० प्रमोद कुमार: उन्होंने कहा कि समितियों को आर्थिक गतिविधियों का मजबूत केंद्र बनाया जा रहा है। बैंक मित्र पहल से ग्रामीण आत्मनिर्भर बनेंगे और अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी।
- पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री श्री सुरेन्द्र मेहता: उन्होंने जोर देकर कहा कि पशुपालन और बैंकिंग का तालमेल किसानों की आय दोगुनी करने में मील का पत्थर साबित होगा। इससे ग्रामीण रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
इन दिग्गजों ने किए हस्ताक्षर
इस ऐतिहासिक एकरारनामे पर बिहार स्टेट को-आपरेटिव बैंक की ओर से प्रबंध निदेशक श्री मनोज कुमार सिंह और कॉम्फेड की ओर से प्रबंध निदेशक श्री समीर सौरभ ने हस्ताक्षर किए। इस मौके पर विभाग के सचिव, नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक और कई जिला सहकारी बैंकों के अध्यक्ष भी मौजूद रहे।
VOB का नजरिया: क्या ‘सुधा’ बदल पाएगी बैंकिंग की सूरत?
बिहार में सुधा डेयरी का नेटवर्क काफी मजबूत और विश्वसनीय है। अगर दुग्ध समितियां वाकई प्रभावी ढंग से बैंकिंग सेवाएं देने में सफल रहीं, तो यह बिहार के ग्रामीण बैंकिंग इतिहास का सबसे बड़ा बदलाव होगा। अब चुनौती इन समितियों के सचिवों को ‘बैंक मित्र’ के तौर पर सही ट्रेनिंग देने और नेटवर्क (Connectivity) की समस्याओं को दूर करने की होगी।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।


