बिहारशरीफ (नालंदा) | 25 फरवरी, 2026: बिहार के नालंदा जिले में इंसान की जान की कीमत अब कौड़ियों के भाव रह गई है। दीपनगर थाना क्षेत्र के डंबरबीघा गांव के पास बदमाशों ने महज ₹5000 के बकाया लेनदेन के विवाद में 17 वर्षीय किशोर, सौरभ कुमार की गोली मारकर बेरहमी से हत्या कर दी। इस वारदात के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
साजिश के तहत ‘डेथ कॉल’: घर से बुलाकर मारी गोली
घटना की जो कहानी सामने आई है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाली है। मृतक सौरभ के भाई ने बताया कि सौरभ का किसी व्यक्ति पर ₹5000 बकाया था। मंगलवार को उसी शख्स ने बकाया राशि लौटाने के बहाने सौरभ को फोन करके घर से बाहर बुलाया। सौरभ अपने एक दोस्त को साथ लेकर डंबरबीघा गांव के पास पहुँचा। उसे अंदाजा भी नहीं था कि जिसे वह अपना पैसा समझकर लेने जा रहा है, वह असल में उसकी मौत का बुलावा है।
दोस्त देखता रह गया और बदमाशों ने कर दिया ‘खेल’
जैसे ही सौरभ डंबरबीघा गांव के पास पहुँचा, वहां पहले से घात लगाकर बैठे बदमाशों ने उसे घेर लिया। इससे पहले कि सौरभ कुछ समझ पाता या उसका दोस्त बीच-बचाव कर पाता, बदमाशों ने सौरभ पर गोलियां बरसा दीं। गोली लगते ही सौरभ जमीन पर गिर पड़ा और खून से लथपथ हो गया। वारदात को अंजाम देने के बाद बदमाश हथियार लहराते हुए मौके से फरार हो गए।
अस्पताल में भारी बवाल, पुलिस ने संभाला मोर्चा
सौरभ को तुरंत पावापुरी के बिम्स (VIMS) अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मौत की खबर मिलते ही अस्पताल परिसर में परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राजगीर डीएसपी सुनील कुमार सिंह, राजगीर थानाध्यक्ष रमन कुमार, और दीपनगर थानाध्यक्ष राजमणि भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे और उग्र परिजनों को समझा-बुझाकर शांत कराया।
पुलिस की कार्रवाई: FSL की टीम करेगी वैज्ञानिक जांच
सदर डीएसपी-2 नुरुल हक ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मामला पूरी तरह से पैसे के लेनदेन के विवाद से जुड़ा है।
- पोस्टमार्टम: शव को कब्जे में लेकर बिहार शरीफ मॉडल अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
- वैज्ञानिक साक्ष्य: घटनास्थल पर एफएसएल (FSL) की टीम को बुलाया जा रहा है ताकि शूटरों के सुराग ढूंढे जा सकें।
- तलाश जारी: पुलिस उस फोन नंबर की जांच कर रही है जिससे सौरभ को बुलाया गया था। संदिग्धों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी गई है।
VOB का नजरिया: ₹5000 की खातिर खत्म हो गया एक चिराग
नालंदा की यह घटना बिहार की कानून व्यवस्था और समाज की गिरती मानसिकता पर गंभीर सवाल उठाती है। क्या ₹5000 एक किशोर की जिंदगी से ज्यादा कीमती हो गए हैं? जब तक अपराधियों में कानून का खौफ नहीं होगा, तब तक उधार के चंद रुपयों के बदले ऐसे ही बेगुनाहों का खून सड़क पर बहता रहेगा।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।


