भागलपुर में सजेगा ‘मंजूषा महोत्सव 2026’ का मंच; 9 मार्च से तीन दिनों तक दिखेगी अंग प्रदेश की गौरवशाली कला

भागलपुर | 24 फरवरी, 2026: अंग प्रदेश की सुप्रसिद्ध लोक कला ‘मंजूषा’ को वैश्विक पहचान देने और स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए आगामी 9, 10 और 11 मार्च को ‘मंजूषा महोत्सव 2026’ का भव्य आयोजन होने जा रहा है। जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी की अध्यक्षता में मंगलवार को जिला प्रशासन के वरीय पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में इस तीन दिवसीय महोत्सव की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया।

सैंडिस कंपाउंड में बिखरेगी कला की छटा

​महोत्सव का आयोजन भागलपुर के प्रसिद्ध सैंडिस कंपाउंड स्थित मुक्ताकाश मंच पर किया जाएगा। इस कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए जिलाधिकारी ने उप विकास आयुक्त (DDC) की अध्यक्षता में एक विशेष ‘कार्यक्रम समिति’ का गठन किया है।

महोत्सव के मुख्य आकर्षण: केवल मनोरंजन नहीं, जागरूकता भी

​तीन दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में विभिन्न सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों का संगम देखने को मिलेगा:

  • संगीत और प्रदर्शकला: शाम के समय ‘संगीत संध्या’ का आयोजन होगा, जिसमें मंझे हुए कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे।
  • जन-जागरूकता अभियान: भागलपुर के सभी 16 प्रखंडों में कलाकार समूहों द्वारा ‘मंजूषा कार्यशाला’ का आयोजन किया जाएगा।
  • प्रतियोगिताएं: बाल, किशोर, युवा और वरिष्ठ कलाकारों के लिए अलग-अलग श्रेणियों में मंजूषा चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित होगी।
  • मंजूषा संगीति: कला पर गंभीर चर्चा के लिए विशेष व्याख्यान कार्यक्रम की शृंखला भी चलाई जाएगी।
  • प्रदर्शनी और स्टाल: चयनित कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी और विभिन्न प्रकार के स्टाल भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे।

कलाकारों के लिए सख्त निर्देश: पोर्टल पर पंजीयन अनिवार्य

​महोत्सव में भागीदारी को लेकर विभाग ने एक महत्वपूर्ण नियम लागू किया है:

  1. पंजीकरण: संगीत संध्या और अन्य गतिविधियों में केवल वही कलाकार भाग ले सकेंगे जिन्होंने कला एवं संस्कृति विभाग के कलाकार पंजीयन पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन कराया है।
  2. संगत कलाकार: मुख्य कलाकार के साथ-साथ उनके साथ रहने वाले संगत कलाकारों का भी पोर्टल पर पंजीकृत होना अनिवार्य है।

द वॉयस ऑफ बिहार की रिपोर्ट: मंजूषा कला भागलपुर की पहचान है। इस महोत्सव के जरिए न केवल नई पीढ़ी को इस प्राचीन कला से जोड़ा जा सकेगा, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी भागलपुर को एक नई पहचान मिलेगी।

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