पटना | 24 फरवरी, 2026: बिहार कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और वर्तमान आईजी (अग्निशमन सेवाएं) सुनील कुमार नायक के लिए सोमवार का दिन भारी गहमागहमी और नाटकीय घटनाक्रमों से भरा रहा। आंध्र प्रदेश में पांच साल पुराने एक कथित आपराधिक मामले को लेकर पटना पहुँची आंध्र पुलिस की टीम को अंततः खाली हाथ लौटने पड़ा। पटना सिविल कोर्ट ने आईजी नायक को बड़ी राहत देते हुए उन्हें पुलिस हिरासत से मुक्त करने का आदेश जारी किया है।
सुबह 6 बजे ‘हाउस अरेस्ट’: पटना से आंध्र तक हड़कंप
मामला सोमवार तड़के शुरू हुआ जब आंध्र प्रदेश पुलिस की एक विशेष टीम बिना किसी पूर्व सूचना के पटना पहुँची:
- तड़के छापेमारी: सुबह ठीक छह बजे आंध्र पुलिस आईजी सुनील नायक के शास्त्रीनगर स्थित सरकारी आवास पर पहुँची।
- नजरबंदी: पुलिस टीम ने आईजी को उनके ही घर में ‘हाउस अरेस्ट’ (नजरबंद) कर लिया।
- ट्रांजिट रिमांड की कोशिश: दोपहर में पुलिस उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर आंध्र प्रदेश ले जाने के उद्देश्य से पटना सिविल कोर्ट लेकर पहुँची।
कोर्ट में पलटा मामला: क्यों नहीं मिली रिमांड?
जब मामला न्यायालय के समक्ष पहुँचा, तो आंध्र पुलिस की कार्रवाई की प्रक्रियात्मक कमियां उजागर होने लगीं। सिटी एसपी (पश्चिमी) भानुप्रताप सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की:
- दस्तावेजों का अभाव: आंध्र प्रदेश पुलिस न्यायालय के समक्ष न तो केस डायरी प्रस्तुत कर पाई और न ही कोई वैध वारंट दिखा सकी।
- प्रोटोकॉल का उल्लंघन: नियमतः बाहरी राज्य की पुलिस को स्थानीय थाने को प्रारंभिक सूचना देनी होती है, जिसका इस मामले में पालन नहीं किया गया था।
- न्यायालय का फैसला: इन तकनीकी खामियों को देखते हुए कोर्ट ने ट्रांजिट रिमांड की मंजूरी देने से साफ इनकार कर दिया।
आईजी का शपथ पत्र और कोर्ट का निर्देश
सुनवाई के दौरान आईजी सुनील कुमार नायक ने कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखा और एक शपथ पत्र (Affidavit) दाखिल किया:
- सहयोग का वादा: उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इस कांड की जांच में आंध्र प्रदेश पुलिस को पूरा सहयोग करेंगे।
- 30 दिनों की मोहलत: कोर्ट ने उन्हें हिरासत से मुक्त करते हुए निर्देश दिया कि वे आगामी 30 दिनों के भीतर आंध्र प्रदेश पुलिस के समक्ष उपस्थित होकर जांच में अपना पक्ष रखें।
क्या है मामला?
यह पूरा विवाद करीब पांच साल पुराना बताया जा रहा है, जो आंध्र प्रदेश में कथित तौर पर हत्या के प्रयास और प्रताड़ना से जुड़ा है। इस मामले की आंच अब बिहार कैडर के इस आला अधिकारी तक पहुँची है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
द वॉयस ऑफ बिहार की रिपोर्ट: एक तरफ जहाँ आंध्र पुलिस की कार्रवाई ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, वहीं स्थानीय पुलिस के हस्तक्षेप और कोर्ट के फैसले ने प्रक्रियात्मक न्याय को बहाल किया है। अब सबकी नजरें आगामी 30 दिनों पर टिकी हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।


