पटना | 21 फरवरी, 2026: बिहार के स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में नीतीश सरकार ने एक बड़ा ऐतिहासिक फैसला लिया है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश के सरकारी अस्पतालों के लिए 1800 विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति के प्रस्ताव को प्रशासनिक मंजूरी दे दी गई है।
इस फैसले का सीधा लाभ ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों के उन मरीजों को मिलेगा जिन्हें छोटी-बड़ी सर्जरी या विशेषज्ञ सलाह के लिए जिला मुख्यालय या राजधानी पटना की दौड़ लगानी पड़ती थी।
इन क्षेत्रों में होगी विशेषज्ञों की बहाली
कैबिनेट विभाग के सूत्रों के अनुसार, इन नियुक्तियों में उन विभागों को प्राथमिकता दी गई है जिनकी मांग सामुदायिक स्तर पर सबसे अधिक है। विशेषज्ञ डॉक्टरों के मुख्य पद निम्नलिखित श्रेणियों में होंगे:
- स्त्री एवं प्रसव रोग (Gynecology): ग्रामीण महिलाओं के सुरक्षित प्रसव और स्वास्थ्य के लिए।
- शिशु रोग (Pediatrics): बच्चों के बेहतर इलाज और टीकाकरण के लिए।
- हड्डी रोग (Orthopedics): दुर्घटनाओं और उम्र संबंधी विकारों के उपचार हेतु।
- ईएनटी (ENT) एवं नेत्र रोग (Ophthalmology): आँख, नाक, कान और गले से जुड़ी समस्याओं के विशेषज्ञ।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) तक पहुँचेगी ‘स्पेशलिस्ट’ सेवा
इस कैबिनेट फैसले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं केवल बड़े मेडिकल कॉलेजों या जिला अस्पतालों तक सीमित नहीं रहेंगी। सरकार की योजना इन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) तक पहुँचाने की है।
”अब तक विशेषज्ञ डॉक्टर केवल बड़े शहरों तक सीमित थे। 1800 नए विशेषज्ञों की नियुक्ति से हम स्वास्थ्य सेवाओं को ब्लॉक स्तर तक ले जा रहे हैं। इससे गरीब मरीजों के समय और पैसे दोनों की बचत होगी।”
— विभागीय सूत्र
कैबिनेट के अन्य प्रमुख फैसले एक नजर में
कल की बैठक में कुल 35 एजेंडों पर मुहर लगी, जिसमें स्वास्थ्य के साथ-साथ अधोसंरचना (Infrastructure) पर भी जोर दिया गया:
- कटाव निरोधक योजना: भागलपुर के इस्माईलपुर-बिंदटोला के लिए 70 करोड़ मंजूर।
- सोनपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट: 4228 एकड़ में बनने वाले नए एयरपोर्ट को हरी झंडी।
- स्वास्थ्य बजट: चिकित्सा संस्थानों में आधुनिक उपकरणों की खरीद के लिए अतिरिक्त फंड।
द वॉयस ऑफ बिहार का विश्लेषण
बिहार में लंबे समय से डॉक्टरों की कमी, विशेषकर विशेषज्ञों की अनुपलब्धता एक बड़ी चुनौती रही है। 1800 विशेषज्ञों की एक साथ नियुक्ति न केवल रोजगार के अवसर पैदा करेगी, बल्कि राज्य के ‘हेल्थ इंडेक्स’ (Health Index) में भी सुधार लाएगी। अब चुनौती इन नियुक्तियों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने और उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाए रखने की होगी।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।


