पटना: बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष और राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव करीब 15 दिनों के बाद सदन की कार्यवाही में शामिल हुए। हालांकि, उनकी मौजूदगी केवल 20 मिनट तक ही रही, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई।
सत्र के दौरान तेजस्वी यादव का सामना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से होना था। माना जा रहा था कि वे सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरेंगे, लेकिन उन्होंने सदन में कोई सवाल नहीं उठाया और न ही बहस में सक्रिय भागीदारी की। सत्ता पक्ष के नेताओं ने इसे ‘औपचारिकता’ करार दिया।
बेटियों की सुरक्षा पर तेजस्वी का हमला
सदन में शामिल होने से पहले और दौरान तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार पर बिहार में बेटियों को असुरक्षित बताकर तीखा हमला किया। उन्होंने कोमल कुमारी नामक दसवीं कक्षा की छात्रा के मामले का जिक्र किया, जिनके परीक्षा केंद्र में समय पर न पहुँच पाने के कारण जीवन की त्रासदी सामने आई। तेजस्वी यादव ने कहा कि यह केवल एक परीक्षा का मामला नहीं, बल्कि उसकी सफलता, नियति और जीवन से जुड़ा दरवाजा था।
तेजस्वी ने सरकार से मांग की कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अविलंब कदम उठाए जाएं और कोमल कुमारी के परिवार को मुआवजा दिया जाए। उन्होंने कहा कि बिहार की बेटियां हमारी सबसे कीमती धरोहर हैं और उनके जीवन की सुरक्षा के लिए हरसंभव प्रयास किया जाना चाहिए।
सदन में केवल 20 मिनट तक रुके तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर भी अपनी चिंता व्यक्त की और कहा कि “हर जगह बेटियां परीक्षा केंद्र के बंद गेट पर रो रही हैं, लेकिन दुख सुनने वाला कोई नहीं। अगर ऐसी घटनाओं को रोका नहीं गया तो कितनी और बेटियों की जान जा सकती है।”


