द वॉयस ऑफ बिहार | पटना (20 फरवरी 2026)
पटना के मसौढ़ी में मैट्रिक की एक छात्रा द्वारा परीक्षा केंद्र में प्रवेश न मिलने के कारण आत्महत्या किए जाने की खबर ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। इस दुखद घटना पर अब बिहार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने सरकार का पक्ष रखा है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि विभाग इस मामले की गंभीरता को समझता है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
सरकार ने लिया मामले का संज्ञान
विधानसभा परिसर के बाहर पत्रकारों से बातचीत करते हुए शिक्षा मंत्री ने घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी:
- निश्चित कार्रवाई: मंत्री ने कहा कि सरकार ने मसौढ़ी की घटना का संज्ञान लिया है और इस मामले की जांच के बाद निश्चित रूप से उचित कार्रवाई की जाएगी।
- छात्रों का हित सर्वोपरि: जब उनसे पूछा गया कि क्या भविष्य में ‘मामूली देरी’ के मामलों में नियमों में नरमी बरती जाएगी, तो उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार छात्रों के हित में जो भी उपयुक्त और आवश्यक कदम होंगे, वह उठाएगी।
क्या थी पूरी घटना?
यह मामला मंगलवार (17 फरवरी) का है, जिसने परीक्षा नियमों की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं:
- 10 मिनट की देरी: कक्षा 10 की छात्रा अपने परीक्षा केंद्र पर कथित तौर पर मात्र 10 मिनट की देरी से पहुँची थी।
- प्रवेश से इनकार: नियमों का हवाला देते हुए परीक्षा केंद्र के अधिकारियों ने उसे अंदर जाने की अनुमति नहीं दी।
- आत्मघाती कदम: परीक्षा न दे पाने के सदमे और हताशा में छात्रा ने कथित रूप से आत्महत्या कर ली।
नियमों पर छिड़ी बहस
इस घटना के बाद से ही बिहार में मैट्रिक परीक्षा के कड़े नियमों को लेकर बहस तेज हो गई है। जहाँ एक ओर प्रशासन अनुशासन की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अभिभावक और विपक्षी नेता (जैसे पूर्व सीएम राबड़ी देवी) इसे प्रशासनिक संवेदनहीनता करार दे रहे हैं। शिक्षा मंत्री के ताजा बयान से उम्मीद जगी है कि भविष्य में ऐसे मामलों को मानवीय दृष्टिकोण से देखने के लिए दिशा-निर्देशों में बदलाव हो सकता है।
शिक्षा और बिहार की हर बड़ी खबर के लिए जुड़े रहें: 👉 www.voiceofbihar.in


