
द वॉयस ऑफ बिहार | भागलपुर (20 फरवरी 2026)
भागलपुर नगर निगम द्वारा अवैध पार्किंग के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को शहर की पूर्व मेयर डॉ. वीणा यादव ने ही ‘आईना’ दिखा दिया है। उन्होंने निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि जनता पर जुर्माना थोपने से पहले उन्हें बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
“पार्किंग है नहीं, तो गाड़ियां खड़ी कहाँ होंगी?”
डॉ. वीणा यादव ने निगम के अभियान को तर्कहीन बताते हुए कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं:
- सुविधा बनाम जुर्माना: उन्होंने दोटूक कहा कि नागरिकों को पहले पार्किंग की सुविधा दी जानी चाहिए, उसके बाद ही पेनाल्टी लगाने का नैतिक और कानूनी अधिकार बनता है।
- योजना का अभाव: पूर्व मेयर ने सवाल किया कि आखिर निगम बताए कि उसने अब तक शहर में पार्किंग स्थल कहाँ विकसित किए हैं?
- आमजन की परेशानी: उन्होंने चिंता जताई कि बाजार जाने वाले ग्राहक और डॉक्टरों के पास आने वाले मरीज आखिर अपनी गाड़ियां कहाँ खड़ी करेंगे, जब कोई निर्धारित स्थान ही नहीं है।
जब पूर्व मेयर के आवास के सामने से टो हुई गाड़ी
यह विवाद तब और गरमा गया जब दो दिन पूर्व नगर निगम की टीम ने डॉ. वीणा यादव के आवास के सामने से एक कार को टो (Tow) कर लिया।
- निजी नाराजगी नहीं, जनहित का सवाल: यह गाड़ी उनके मामा ससुर की थी, लेकिन डॉ. वीणा ने स्पष्ट किया कि उनकी नाराजगी गाड़ी को लेकर नहीं है।
- कड़ा तंज: उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, “गाड़ी तो मैंने निगम को गिफ्ट कर दी, सवाल जन सुविधा का है”। उनका तर्क है कि बिना पार्किंग व्यवस्था के ऐसी कोई भी कार्रवाई सफल नहीं हो सकती।
‘कबाड़खाना’ बने थाने
पूर्व मेयर ने शहर की एक और बड़ी समस्या की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि पूरे भागलपुर में थानों के बाहर जब्त की गई गाड़ियों का अंबार लगा हुआ है, जिससे वे इलाके ‘कबाड़खाना’ नजर आते हैं।
डॉ. वीणा यादव का अनुभव: “मैं भी मेयर थी और 20 साल पहले मैंने पार्किंग की योजना बनाई थी और जो संभव था, उसे धरातल पर उतारा भी था।”
पूर्व मेयर के इस कड़े रुख ने नगर निगम के मौजूदा अभियान पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। अब देखना यह है कि निगम प्रशासन सुविधाओं के विस्तार पर ध्यान देता है या केवल जुर्माना वसूली तक ही सीमित रहता है।
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