
पटना: बिहार सरकार ने बिजली कनेक्शन से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब यदि कोई व्यक्ति अपने पिता या दादा की पैतृक जमीन पर घर बनाकर रह रहा है, तो उसे नए बिजली कनेक्शन के लिए अपने नाम की जमीन रसीद या एलपीसी (LPC) प्रस्तुत करना अनिवार्य नहीं होगा। वंशावली के आधार पर भी कनेक्शन के लिए आवेदन किया जा सकेगा। इस बदलाव से राज्य के हजारों परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है।
पहले क्या था नियम?
पहले नियम के अनुसार, बिजली कनेक्शन केवल उसी व्यक्ति के नाम पर दी जाती थी, जिसके नाम पर जमीन की रसीद होती थी। इससे कई परिवारों को परेशानी होती थी, क्योंकि वे वर्षों से पैतृक जमीन पर रह रहे थे, लेकिन जमीन उनके नाम पर नहीं थी।
अब इस बाध्यता को हटा दिया गया है। परिवार के सदस्य वंशावली प्रस्तुत कर यह प्रमाणित कर सकेंगे कि वे पैतृक जमीन पर रह रहे हैं और उसी आधार पर कनेक्शन ले सकेंगे।
नया नियम कहां लागू होगा?
यह नियम पूरे बिहार में लागू होगा—चाहे आवेदक पटना जैसे शहरी क्षेत्र में रहता हो या किसी गांव या छोटे शहर में। सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवारों तक बिजली सुविधा पहुंचाना है।
किन मामलों में पुराने नियम लागू रहेंगे?
- यदि किसी मकान या परिसर में पहले से एक कनेक्शन है और उसी जगह दूसरा कनेक्शन लेना है, तो पारिवारिक बंटवारा पत्र देना होगा।
- किरायेदारों को पंजीकृत किरायानामा प्रस्तुत करना अनिवार्य रहेगा।
- अलग कनेक्शन तभी दिया जाएगा, जब आवास, रसोई आदि पूरी तरह अलग हों।
आवेदन कैसे करें?
बिजली कनेक्शन के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन के दौरान निम्न दस्तावेज अपलोड करने होंगे:
- आवेदक का फोटो
- आधार कार्ड
- जमीन से संबंधित दस्तावेज या वंशावली
आवेदन के बाद संबंधित विभाग द्वारा जांच की जाएगी और प्रक्रिया पूरी की जाएगी। किसी भी समस्या की स्थिति में विभागीय कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।
कनेक्शन मिलने में कितना समय लगेगा?
सरकार के अनुसार:
- शहरी क्षेत्रों: लगभग 7 दिन
- ग्रामीण क्षेत्रों: लगभग 15 दिन
वजह क्या है इस बदलाव की?
मुफ्त बिजली योजना लागू होने के बाद एक ही परिसर में कई कनेक्शन लेने की कोशिशें बढ़ गई थीं। ऐसे में सरकार ने प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाते हुए जरूरतमंद परिवारों को राहत देने का निर्णय लिया, ताकि वास्तविक लाभार्थियों को आसानी से बिजली सुविधा मिल सके।


