
द वॉयस ऑफ बिहार | पटना/डेस्क
बिहार में हिंसा और प्रताड़ना की शिकार महिलाओं को तत्काल सहायता, न्याय और आश्रय प्रदान करने के लिए राज्य सरकार अपने ‘वन स्टॉप सेंटर’ (One Stop Center) नेटवर्क का बड़ा विस्तार करने जा रही है। समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत महिला एवं बाल विकास निगम राज्यभर में 26 नए केंद्र बनाने की तैयारी में है। इन नए केंद्रों के शुरू होते ही प्रदेश में कुल केंद्रों की संख्या बढ़कर 65 हो जाएगी।
अब ग्रामीण महिलाओं की पहुंच होगी आसान
वर्तमान में बिहार के सभी जिलों में एक-एक और पटना में दो केंद्र संचालित हैं। नए केंद्रों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें जिला मुख्यालय से दूर अनुमंडल मुख्यालयों (Sub-division levels) पर बनाया जा रहा है।
- दूरी का समाधान: जिला मुख्यालय से लगभग 40 किमी दूर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं को अब कानूनी या चिकित्सा सहायता के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी होगी।
- समेकित सेवाएं: एक ही छत के नीचे पीड़िता को आश्रय, भोजन, कपड़े, डॉक्टरी सहायता और कानूनी परामर्श उपलब्ध कराया जाता है।
सफलता का रिपोर्ट कार्ड: 20 हजार मामलों का हुआ निपटारा
वन स्टॉप केंद्रों की उपयोगिता का अंदाजा पिछले तीन वर्षों के इन आंकड़ों से लगाया जा सकता है:
वित्तीय वर्ष | दर्ज कुल मामले | निष्पादित (सफल निपटारा) |
|---|---|---|
2023-24 | 7,517 | 6,599 |
2024-25 | 8,888 | 7,185 |
2025-26 (जनवरी तक) | 7,180 | 6,322 |
कुल योग | 23,585 | लगभग 20,000+ |
मदद के लिए बस एक कॉल की दूरी: हेल्पलाइन 181
किसी भी तरह की हिंसा या मुसीबत में फंसी महिला तुरंत मदद के लिए इन माध्यमों का उपयोग कर सकती है:
- हेल्पलाइन नंबर: 181 पर कॉल कर सहायता मांग सकते हैं।
- आपातकालीन सेवा: इन केंद्रों को पुलिस की इमरजेंसी रिस्पॉन्स प्रणाली 112 से भी जोड़ा गया है।
- कौशल विकास: केवल न्याय ही नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए यहाँ कौशल प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
सिर्फ समाधान नहीं, पुनर्वास पर भी नजर
वन स्टॉप सेंटर की कार्यप्रणाली बेहद संवेदनशील है। समस्या सुलझने के बाद भी कम से कम 6 महीने तक पीड़िता की निगरानी की जाती है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उसके साथ दोबारा हिंसा न हो। जिला स्तर पर इसकी समीक्षा खुद जिलाधिकारी (DM) और एसपी (SP) की कमेटी करती है।


