डिजिटल अरेस्ट का खौफ: पूर्व CAG अफसर और उनकी पत्नी को 18 दिन तक किया ‘कैद’, CBI-ED का डर दिखाकर 2.13 करोड़ की ठगी

बड़ी वारदात: नरेश गोयल के मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की दी धमकी; वीडियो कॉल पर लगातार रखी निगरानी

वॉइस ऑफ बिहार (क्राइम डेस्क)

​साइबर ठगों के हौसले अब इस कदर बुलंद हो गए हैं कि वे देश के शीर्ष पदों से रिटायर हुए अधिकारियों को भी आसानी से अपना शिकार बना रहे हैं। ताजा और बेहद चौंकाने वाला मामला एक सेवानिवृत्त कैग (CAG) अधिकारी और उनकी पत्नी का है। जालसाजों ने इस बुजुर्ग दंपति को पूरे 18 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) में रखा और उनसे 2.13 करोड़ रुपये की भारी-भरकम ठगी कर ली। ठगों ने खुद को सीबीआई (CBI), ईडी (ED) और मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर इस पूरी वारदात को अंजाम दिया।

कैसे बुना गया खौफ का जाल?

​सेक्टर-64C के रहने वाले पीड़ित इंद्र कुमार ने पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में बताया कि इस खौफनाक खेल की शुरुआत बीते 13 जनवरी को हुई।

  • व्हाट्सऐप कॉल से एंट्री: जालसाजों ने सबसे पहले व्हाट्सऐप कॉल के जरिए दंपति से संपर्क किया और पूरे आत्मविश्वास के साथ खुद को केंद्रीय जांच एजेंसी का बड़ा अधिकारी बताया।
  • मनी लॉन्ड्रिंग का फर्जी आरोप: ठगों ने दंपति को डराते हुए कहा कि उनके बैंक खाते में ‘नरेश गोयल’ नामक व्यक्ति से मनी लॉन्ड्रिंग के 20 लाख रुपये आए हैं और अब वे इस गंभीर कानूनी पचड़े में फंस चुके हैं।

18 दिन तक वीडियो कॉल पर ‘कैद’ रहे पति-पत्नी

​साइबर अपराधियों ने पूछताछ और कानूनी कार्रवाई का ऐसा खौफ पैदा किया कि अफसर और उनकी पत्नी पूरी तरह सहम गए।

    • पल-पल की निगरानी: ठगों ने दंपति को सख्त निर्देश दिया कि वे अपना कैमरा बंद नहीं करेंगे। पूरे 18 दिनों तक वीडियो कॉल के जरिए जालसाज स्क्रीन के उस पार से उन पर नजर बनाए रहे।
    • मानसिक प्रताड़ना: पूछताछ और गिरफ्तारी का डर दिखाकर लगातार मानसिक दबाव बनाया गया। इसी खौफ का फायदा उठाकर ठगों ने धीरे-धीरे कर दंपति से कुल 2 करोड़ 13 लाख रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करवा लिए।

अलर्ट: क्या होता है डिजिटल अरेस्ट? > भारतीय कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। यह साइबर ठगों का नया पैंतरा है, जिसमें वे वीडियो कॉल पर पुलिस या अधिकारी बनकर पीड़ित को डराते हैं और उन्हें घर से बाहर निकलने या किसी से बात करने से मना करते हैं। कोई भी असली जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर इस तरह पैसे की मांग नहीं करती।

​फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जिन बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर हुए हैं, उनकी जांच की जा रही है।

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