भागलपुर (पीरपैंती) | पीरपैंती पावर प्लांट के लिए अधिग्रहित जमीन पर अभी भी खेती करने और मुआवजे के पेंच को सुलझाने के लिए गुरुवार को जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी खुद पीरपैंती पहुंचे। उनके साथ एसएसपी प्रमोद कुमार यादव और कहलगांव एसडीएम श्री कृष्ण चंद्रगुप्त भी मौजूद थे। बैठक में डीएम ने रैयतों की समस्याएं सुनीं और कुछ कड़े संदेश भी दिए।
1. “किससे पूछकर दोबारा फसल लगाई?”
डीएम ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जमीन अधिग्रहण की अधिसूचना 2013 में जारी हुई थी और 2015 में मुआवजा भी दिया जा चुका है।
- सितंबर 2025 में खुद प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने इस प्लांट के काम का शुभारंभ किया था।
- अक्टूबर-नवंबर में पिछली फसल कट चुकी थी।
- डीएम ने सवाल दागा: “जब जमीन सरकार की हो चुकी है, तो फिर किससे पूछकर दोबारा फसल लगा दी गई? यह जमीन अब आपकी नहीं है।”
2. मुआवजा फंसा है? यह है रास्ता
कई रैयतों का पैसा पारिवारिक विवाद या कागजी पेंच में फंसा है। इसके लिए डीएम ने दो समाधान बताए:
- आपसी विवाद वाले मामले: जिन रैयतों के उत्तराधिकारियों के बीच विवाद है और मामला कोर्ट (Civil/LADA) में है, वे अगर आपस में समझौता कर लें, तो प्रशासन कोर्ट से केस वापस ले लेगा। डीएम ने कहा, “पैसा भू-अर्जन कार्यालय में रखा है। आप जितना जल्दी विवाद निपटाएंगे, पैसा उतना जल्दी मिल जाएगा।”
- 50 लाख से ज्यादा वाला पेंच: जिन मूल रैयतों की मृत्यु हो चुकी है और मुआवजा 50 लाख से ज्यादा है, उन्हें अभी सिविल कोर्ट से उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र लाना पड़ता है। डीएम ने बताया कि इसके लिए विभाग को पत्र लिखा गया है। अगर 50 लाख की सीमा बढ़ा दी जाती है, तो यह भुगतान सीधे भू-अर्जन कार्यालय से हो जाएगा और कोर्ट के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
3. ‘भोली-भाली जनता को न बरगलाएं’
डीएम ने सख्त लहजे में कहा कि कुछ लोग इस मामले में राजनीति कर रहे हैं और किसानों को गलत जानकारी देकर भड़का रहे हैं।
- प्रशासन की नजर ऐसे लोगों पर है।
- अगर कोई सरकारी काम में बाधा डालने के लिए लोगों को दिग्भ्रमित करेगा, तो उस पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


