मुजफ्फरपुर/गया।बिहार में शायद पहली बार किसी जिंदा व्यक्ति का विधिवत श्राद्ध और पिंडदान किया गया। मामला किसी आम आदमी का नहीं, बल्कि एक ऐसे दारोगा का है, जिसने खुद को अदालत में “मृत” साबित कर दिया था। अब उसी दारोगा का गयाजी में श्राद्ध कर एक वकील ने न सिर्फ अपनी 14 साल पुरानी प्रतिज्ञा पूरी की, बल्कि पुलिस–प्रशासन और न्याय व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया।
मानवाधिकार मामलों के अधिवक्ता एस.के. झा ने गयाजी में दारोगा रामचंद्र सिंह का पूरे विधि-विधान से श्राद्ध, पिंडदान और ब्राह्मण भोज कराया। जबकि सच्चाई यह है कि रामचंद्र सिंह आज भी जीवित हैं और पटना में रह रहे हैं।
खुद को कोर्ट में बताया था ‘मृत’
यह कहानी शुरू होती है साल 2012 से। मुजफ्फरपुर के अहियापुर थाना क्षेत्र के नेउरी गांव निवासी शिक्षक अनंत राम को एक झूठे दुष्कर्म मामले में फंसा दिया गया। केस की जांच दारोगा रामचंद्र सिंह कर रहे थे।
जांच में भारी गड़बड़ी हुई। अनंत राम को जेल भेज दिया गया और चार्जशीट दाखिल कर दी गई। जब ट्रायल शुरू हुआ और सच्चाई सामने आने लगी, तब कोर्ट ने दारोगा को गवाही के लिए बुलाया।
इसी बीच दारोगा ने एक बड़ा खेल खेला—
पत्नी के जरिए कोर्ट में अपना डेथ सर्टिफिकेट जमा करा दिया।
उसमें मृत्यु तिथि 15 दिसंबर 2009 दर्ज थी, जबकि वह 2012 में केस की जांच कर रहा था।
“2009 में मरा आदमी 2012 में कैसे जांच करेगा?”
इस फर्जीवाड़े को सबसे पहले पकड़ा अधिवक्ता एस.के. झा ने। उन्होंने कोर्ट में सवाल उठाया—
“जो आदमी 2009 में मर चुका है, वह 2012 में केस की जांच कैसे कर सकता है?”
जांच का आदेश हुआ, लेकिन इससे पहले ही दारोगा ने ट्रांसफर करा लिया और कोर्ट की नजर में ‘ट्रेसलेस’ हो गया। विभाग ने भी कोई जानकारी नहीं दी।
इसी गलत जांच के आधार पर शिक्षक अनंत राम को 7 साल की सजा हो गई। बाद में पटना हाईकोर्ट ने उन्हें बाइज्जत बरी किया और नौकरी भी लौटाई।
वकील की ‘भिष्म प्रतिज्ञा’
इस अन्याय से आहत होकर अधिवक्ता एस.के. झा ने सार्वजनिक रूप से जनेऊ तोड़कर संकल्प लिया—
“जब तक इस दारोगा को जीवित साबित नहीं कर दूंगा, दोबारा जनेऊ नहीं पहनूंगा।”
12 साल की खोज के बाद उन्होंने रामचंद्र सिंह को जिंदा ढूंढ़ निकाला और प्रमाण भी सामने रखे। इसके बाद उन्होंने फिर जनेऊ धारण किया।
14 साल बाद जिंदा का श्राद्ध
हालांकि, कोर्ट के रिकॉर्ड में आज भी रामचंद्र सिंह “मृत” हैं। इसलिए अपनी 14 साल पुरानी प्रतिज्ञा पूरी करते हुए एस.के. झा ने गयाजी में उनका विधिवत श्राद्ध, पिंडदान और ब्राह्मण भोज कराया।
“यह श्राद्ध नहीं, सिस्टम पर प्रहार है”
एस.के. झा ने कहा—
“यह श्राद्ध उस सिस्टम के खिलाफ है, जहां निर्दोष सालों जेल में सड़ते हैं और दोषी अफसर खुद को मृत बताकर बच निकलते हैं। शायद यह कर्मकांड प्रशासन और न्याय व्यवस्था को झकझोर सके।”
दारोगा कहां का रहने वाला?
रामचंद्र सिंह अरवल जिले के कुर्था थाना क्षेत्र के गौहरा गांव का मूल निवासी है और फिलहाल पटना में रह रहा है।
यह मामला अब सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की साख पर सवाल बन चुका है।


