Cancer Treatment होगा सस्ता, 17 दवाओं पर कस्टम ड्यूटी पूरी तरह खत्म.. बजट 2026 में मरीजों के लिए बड़ी राहत, दवाओं के दाम 10–12% तक घटेंगे

नई दिल्ली।कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहे लाखों परिवारों के लिए बजट 2026 उम्मीद की बड़ी खबर लेकर आया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया है कि कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 17 प्रमुख दवाओं पर लगने वाली बेसिक कस्टम ड्यूटी को पूरी तरह शून्य कर दिया गया है।

इस फैसले से महंगी आयातित दवाएं अब पहले से काफी सस्ती हो जाएंगी और मरीजों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम होगा।


इलाज की बढ़ती लागत पर सरकार का बड़ा प्रहार
भारत में कैंसर का इलाज अक्सर मिडिल क्लास परिवारों की जमा पूंजी खत्म कर देता है। वजह है महंगी विदेशी दवाएं। अब तक इन दवाओं पर 5 से 10 प्रतिशत तक सीमा शुल्क और उस पर सोशल वेलफेयर सरचार्ज लगता था।

अब यह टैक्स हट जाने से दवाओं के दाम सीधे तौर पर 10 से 12 प्रतिशत तक कम हो सकते हैं।
उदाहरण के तौर पर जो दवा पहले 10,000 रुपये की थी, वह अब लगभग 8,800 से 9,000 रुपये में मिल सकती है।


क्या होती है बेसिक कस्टम ड्यूटी?
बेसिक कस्टम ड्यूटी वह कर है, जो सरकार विदेश से आने वाले सामान पर लगाती है। इसका मकसद राजस्व बढ़ाना और घरेलू उद्योगों को संरक्षण देना होता है।

लेकिन कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को देखते हुए सरकार ने राजस्व से ऊपर मानव जीवन को प्राथमिकता दी है।

अब इन दवाओं पर सिर्फ जीएसटी लागू होगा, जिससे इनकी कुल कीमत काफी कम हो जाएगी।


17 कैंसर दवाओं पर राहत का सीधा असर
बजट 2026-27 की सबसे बड़ी स्वास्थ्य घोषणाओं में यह कदम शामिल है। ये दवाएं कैंसर इलाज की कुल लागत का बड़ा हिस्सा होती हैं।

सरकार का उद्देश्य है कि
• महंगे इलाज का बोझ घटे
• आधुनिक उपचार ज्यादा लोगों तक पहुंचे
• गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को राहत मिले


दुर्लभ रोगों के मरीजों को भी फायदा
राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति (NPRD) के तहत शामिल कई बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं पर भी यह राहत अप्रत्यक्ष रूप से असर डालेगी।

इनमें शामिल हैं
लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर
म्यूकोपॉलीसैकराइडोसिस (MPS)
स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA)
ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (DMD)
सिस्टिक फाइब्रोसिस
हेरिडिटरी एंजियोएडेमा
न्यूरोनल सेरॉइड लिपोफ्यूसिनोसिस


सरकार का फोकस – सस्ता और सुलभ इलाज
बजट में लिया गया यह फैसला साफ संकेत देता है कि सरकार अब स्वास्थ्य सेवाओं को
किफायती, सुलभ और समावेशी बनाने पर जोर दे रही है।

जीवन रक्षक दवाओं पर टैक्स हटाकर सरकार ने मरीजों की सबसे बड़ी चिंता—इलाज का खर्च—पर सीधा वार किया है।

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