बाढ़।बाढ़ के उमानाथ मंदिर परिसर में लगने वाला माघी पूर्णिमा मेला इस बार आस्था के साथ रहस्य और रोमांच का अनोखा संगम बन गया है। शनिवार से ही मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी थी और रविवार को यह संख्या लाखों में पहुंच गई।
अनुमान है कि मेले में 8 से 10 लाख श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर परिसर से लेकर मुख्य सड़कों और गलियों तक हर ओर भीड़ ही भीड़ नजर आई। प्रशासन ने निजी वाहनों पर रोक लगाई थी, इसके बावजूद भीड़ का दबाव लगातार बढ़ता रहा।
गली-गली भरी भीड़, हर ओर जयकारे
सुबह से ही उमानाथ मंदिर के दर्शन और पूजा के लिए श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं। लोग दूर-दराज के जिलों से भी यहां पहुंचे। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की भारी मौजूदगी से पूरा इलाका मेले में तब्दील हो गया।
पूजा के साथ ‘भूत खेली’ का अनोखा दृश्य
मेले का सबसे चर्चित पहलू रहा भगत और भक्तिनियों द्वारा ‘भूत खेली’ का खेल।
पूजा के दौरान कुछ लोग दावा करते हैं कि उन पर देवी-देवताओं का वास हो गया है। इसके बाद वे अजीब तरह से नाचने, चिल्लाने और अलग-अलग मुद्राएं बनाने लगते हैं।
घरों से बाहर न निकलने वाली महिलाएं भी हुईं शामिल
इस खेल में कई ऐसी महिलाएं भी शामिल रहीं जो सामान्य दिनों में घर से बाहर नहीं निकलतीं। लेकिन मेले में वे भी भगतों के साथ नाचती, झूमती और लोगों की समस्याएं दूर करने का दावा करती दिखीं।
आस्था, रहस्य और रोमांच का संगम
उमानाथ मेला सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि लोक आस्था, परंपरा और लोकविश्वास का बड़ा केंद्र बन चुका है।
यहां आने वाले श्रद्धालु इसे चमत्कार और शक्ति का स्थल मानते हैं, वहीं देखने वाले इसे रहस्यमयी अनुभव के रूप में देखते हैं।


