नई दिल्ली।विकसित भारत के विजन को नई रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने बजट में बड़ा ऐलान किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश में 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की घोषणा की है। इन्हें ग्रोथ कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि बड़े शहरों, औद्योगिक क्षेत्रों और व्यापारिक हब को तेज, सुरक्षित और आधुनिक रेल नेटवर्क से जोड़ा जा सके।
इनमें से वाराणसी से सिलीगुड़ी तक बनने वाला कॉरिडोर बिहार के कई जिलों से होकर गुजरेगा। इससे राज्य के लिए नए आर्थिक अवसर खुलेंगे और पूर्वी भारत की कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक बदलाव आएगा।
किन रूटों पर दौड़ेगी हाई-स्पीड ट्रेन
सरकार ने जिन 7 कॉरिडोर की घोषणा की है, वे इस प्रकार हैं—
- मुंबई – पुणे
- पुणे – हैदराबाद
- हैदराबाद – बेंगलुरु
- हैदराबाद – चेन्नई
- चेन्नई – बेंगलुरु
- दिल्ली – वाराणसी
- वाराणसी – सिलीगुड़ी (बिहार होकर)
इन रूटों पर हाई-स्पीड ट्रेनों के संचालन से देश के प्रमुख महानगर और औद्योगिक क्षेत्र कुछ ही घंटों में एक-दूसरे से जुड़ जाएंगे।
बिहार के लिए क्यों खास है यह परियोजना
वाराणसी–सिलीगुड़ी हाई-स्पीड कॉरिडोर बिहार से होकर गुजरेगा। इससे—
- पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, भागलपुर जैसे क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
- व्यापार, पर्यटन और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
- युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
रेल विशेषज्ञों का कहना है कि यह कॉरिडोर बिहार के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है।
यात्रा होगी तेज, कारोबार को मिलेगा पंख
सरकार का कहना है कि इन हाई-स्पीड कॉरिडोर से—
- लंबी दूरी की यात्रा का समय आधे से भी कम हो जाएगा।
- लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी, जिससे उद्योगों को लाभ मिलेगा।
- नए औद्योगिक क्लस्टर और स्मार्ट सिटी विकसित होंगे।
विकसित भारत की ओर बड़ा कदम
वित्त मंत्री ने कहा कि यह सिर्फ ट्रेनों की योजना नहीं, बल्कि भारत के आर्थिक नक्शे को बदलने की रणनीति है। ये ग्रोथ कॉरिडोर देश को वैश्विक निवेश के लिए और आकर्षक बनाएंगे।
सरकार के इस फैसले से यह साफ हो गया है कि आने वाले वर्षों में भारत की रफ्तार केवल सड़कों पर ही नहीं, बल्कि रेल की पटरियों पर भी तेज़ी से दौड़ेगी।


