समस्तीपुर। शराबबंदी को लेकर चल रही एक सामान्य जांच ने उस परिवार को सबसे बड़ी खुशी दे दी, जिसने आठ साल पहले अपने बेटे के लौटने की उम्मीद छोड़ दी थी। कुंवर सिंह चेक पोस्ट पर उत्पाद विभाग की टीम ने शराब पीने के आरोप में एक युवक को पकड़ा, लेकिन जब उसकी पहचान सामने आई तो यह मामला एक भावुक मिलन की कहानी में बदल गया।
8 साल से लापता था सुधीर
जांच के दौरान युवक ने अपना नाम सुधीर दास, पिता ज्ञानी दास, उम्र लगभग 20 वर्ष, निवासी मरीचा गांव, थाना हलई, जिला समस्तीपुर बताया। जब उत्पाद विभाग ने उसके पते की पुष्टि के लिए संबंधित थाना से संपर्क किया, तो पता चला कि सुधीर करीब आठ वर्षों से लापता था।
सूचना मिलते ही उत्पाद विभाग ने समस्तीपुर पुलिस और उसके परिजनों को जानकारी दी। थोड़ी ही देर में परिवार मौके पर पहुंचा। जैसे ही परिजनों ने सुधीर को देखा, आंखों में आंसू और चेहरे पर राहत की मुस्कान साफ झलक रही थी।
शादी, बच्चा और फिर अचानक गुमशुदगी
मोरवा-17 की जिला परिषद सदस्य कैलाशी दास ने बताया कि सुधीर की शादी हो चुकी थी और उसका एक दो साल का बच्चा भी था। इसके बावजूद वह अचानक घर छोड़कर चला गया। परिजनों ने उसकी काफी तलाश की, लेकिन कहीं कोई सुराग नहीं मिला।
करीब एक साल तक पत्नी इंतजार करती रही। फिर मायके चली गई और चार साल बाद दूसरी शादी कर ली। परिवार ने भी मान लिया था कि सुधीर अब कभी लौटकर नहीं आएगा।
बड़े परिवार का बेटा
सुधीर सात भाइयों में चौथे नंबर पर है और उसकी तीन बहनें भी हैं। करीब 17 साल पहले उसकी मां की करंट लगने से मौत हो गई थी। वह बचपन से ही शांत स्वभाव का था और मजदूरी कर गुजर-बसर करता था।
कहां रहा इतने साल?
सुधीर अब भी यह साफ नहीं बता पा रहा है कि वह इतने वर्षों तक कहां रहा। बस इतना कहता है कि जहां भी रहा, मजदूरी कर पेट भरता रहा।
उत्पाद विभाग की टीम भी हुई भावुक
उत्पाद अधीक्षक अशरफ जमाल ने बताया कि यह एक सामान्य जांच थी, लेकिन अंत में यह एक टूटे परिवार को फिर से जोड़ने का कारण बन गई। उन्होंने कहा कि यह घटना लंबे समय तक याद रखी जाएगी।
एक नियमित शराब जांच… और उसके पीछे छुपी एक अधूरी कहानी का सुखद अंत।


