बिहार सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के सोशल मीडिया उपयोग पर कसे शिकंजे

पटना। बिहार सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर सख्त दिशा-निर्देश लागू कर दिए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में बिहार सरकारी सेवक आचार (संशोधन) नियमावली, 2026 को मंजूरी दी गई। यह संशोधन वर्ष 1976 की बिहार सेवक आचार संहिता में किया गया है।

क्यों लाए गए नए नियम

इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म और इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप्स के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए सरकार ने स्पष्ट नियम तय किए हैं। कैबिनेट बैठक में कुल 32 प्रस्तावों को स्वीकृति मिली, जिनमें यह संशोधन प्रमुख रहा।

सरकारी पहचान से सोशल मीडिया अकाउंट पर रोक

नए नियमों के तहत कोई भी सरकारी सेवक अपने पदनाम, सरकारी ई-मेल आईडी, मोबाइल नंबर या किसी भी आधिकारिक पहचान का उपयोग कर सोशल मीडिया अकाउंट नहीं बना सकेगा।
फेसबुक, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर व्यक्तिगत अकाउंट से भी ऐसी सामग्री साझा करना प्रतिबंधित होगा, जो सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाए या नीतियों पर नकारात्मक प्रभाव डाले।

व्यक्तिगत विचार, लेकिन मर्यादा जरूरी

संशोधित नियमों में कहा गया है कि सरकारी कर्मचारी व्यक्तिगत विचार व्यक्त कर सकते हैं, लेकिन वे पेशेवर जिम्मेदारियों से टकराने नहीं चाहिए
सरकारी नीतियों, फैसलों या कार्यप्रणाली पर नकारात्मक टिप्पणी, वरिष्ठ अधिकारियों की आलोचना और गोपनीय सूचनाओं या दस्तावेजों का खुलासा पूरी तरह वर्जित रहेगा।

फर्जी और गुमनाम अकाउंट पर पूर्ण प्रतिबंध

छद्म नाम या फर्जी पहचान से सोशल मीडिया अकाउंट चलाने पर सख्त रोक लगाई गई है। ऐसे अकाउंट्स से सरकारी अधिकारियों की आलोचना, भड़काऊ सामग्री या संवेदनशील जानकारी साझा करने पर कार्रवाई होगी।

उल्लंघन पर सख्त विभागीय कार्रवाई

नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सरकार का मानना है कि सोशल मीडिया पर अनुशासनहीन गतिविधियां प्रशासन की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाती हैं।

न्यायालय के फैसलों पर टिप्पणी भी वर्जित

नियमावली में सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट या किसी भी न्यायालय के फैसलों पर टिप्पणी करने पर रोक लगाई गई है।
सरकारी या राजनीतिक संगठनों के चिन्हों के उपयोग, मीडिया संस्थानों की आलोचना, सोशल मीडिया से आय अर्जित करने, किसी बैठक या सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग पर भी प्रतिबंध रहेगा। यौन अपराध पीड़ितों की पहचान उजागर करना सख्त रूप से निषिद्ध है।

क्या बोले अपर मुख्य सचिव

अपर मुख्य सचिव (सामान्य प्रशासन) डॉ. बी. राजेंद्र ने कहा,
“पहले कर्मचारी आचार नियमावली में सोशल मीडिया को लेकर स्पष्ट प्रावधान नहीं थे। अब संशोधन 2026 के तहत नियम तय कर दिए गए हैं। उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई होगी।”

प्रशासनिक अनुशासन और जनविश्वास पर जोर

सरकार के अनुसार, यह फैसला डिजिटल युग में सरकारी सेवकों की जिम्मेदारी और मर्यादा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। इससे प्रशासन की छवि मजबूत होगी और जनता का भरोसा बढ़ेगा। नए नियम तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।


 

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