‘अब बुलडोजर हमारे ऊपर चलेगा’—किसानों की चेतावनी

नालंदा। बिहार में बौद्ध सर्किट को जोड़ने के लिए चंडी के सालेपुर (NH-82) से राजगीर तक लगभग 26.66 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क का निर्माण प्रस्तावित है। इस परियोजना पर करीब ₹862.63 करोड़ की लागत आएगी, लेकिन सिलाव के किसानों के विरोध के कारण ग्रीनफील्ड सड़क निर्माण पर फिलहाल ग्रहण लग गया है।

उचित मुआवजे को लेकर किसानों का विरोध

सिलाव क्षेत्र के किसान सड़क निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों ने सड़क किनारे “उचित मुआवजा नहीं तो काम नहीं” के बोर्ड लगाकर विरोध जताया है। उनका कहना है कि परियोजना के तहत सिलाव के लगभग 100 किसानों की 22 बीघा उपजाऊ और आवासीय भूमि अधिग्रहित की जा रही है, लेकिन मुआवजा बेहद कम दिया जा रहा है।

किसानों के अनुसार, जिस जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है उसकी रजिस्ट्री दर 4 लाख 90 हजार रुपये प्रति डिसमिल है, जबकि प्रशासन की ओर से मात्र 82 हजार रुपये प्रति डिसमिल मुआवजा तय किया गया है।

ADM ने माना किसानों की मांग जायज

28 दिसंबर को सिलाव प्रखंड में किसानों की मांगों को लेकर एक बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें एडीएम रंजन कुमार चौधरी और भू-अर्जन पदाधिकारी मौजूद थे। बैठक में किसानों ने अपनी आपत्तियां रखीं, जिस पर एडीएम ने उनकी मांग को जायज बताया।

एडीएम रंजन कुमार चौधरी ने कहा कि,
“आपलोगों की मांग सही है। जितना जमीन का रेट है, उतना तो मिलना ही चाहिए। लेकिन एक बार जब एवार्ड बन जाता है तो वह जिलाधिकारी के अधिकार क्षेत्र से बाहर चला जाता है। अब इस मामले में बदलाव केवल लारा कोर्ट कर सकता है।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि मुआवजा बढ़ाने के लिए या तो जमीन की प्रकृति बदली जाएगी या एमबीआर रिवाइज होगा, और दोनों ही अधिकार अब Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Authority (LARA कोर्ट) के पास हैं।

किसानों ने आंदोलन की चेतावनी दी

किसान नवीन कुमार ने बताया कि उन्होंने अपनी मांगों को लेकर डीएम, भू-अर्जन पदाधिकारी, राजस्व प्रधान सचिव और मुख्यमंत्री कार्यालय तक आवेदन भेजा है, लेकिन कहीं से कोई सुनवाई नहीं हुई।

नवीन कुमार ने कहा,
“प्रशासन हमें कोर्ट जाने को कह रहा है। गलती प्रशासन की है और कोर्ट हम जाएं? बटाईदारी कर किसी तरह परिवार चला रहे हैं। कोर्ट जाने की हमारी आर्थिक स्थिति नहीं है।”

ग्राम और नगर पंचायत के रेट पर सवाल

किसान रजनीश कुमार ने कहा कि नगर पंचायत क्षेत्र की जमीन का रेट ग्राम पंचायत के बराबर तय किया जा रहा है, जो पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि पहले भी NH-82 के भू-अर्जन का मामला लंबित है और अब फिर वही स्थिति बनाई जा रही है।

रजनीश कुमार ने कहा,
“हम विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उचित मुआवजा चाहिए। हमारी जमीन चली जाएगी और उस पैसे में आसपास एक डिसमिल जमीन भी नहीं खरीदी जा सकती।”

100 लोगों की 22 बीघा भूमि अधिग्रहण

किसानों का दावा है कि सिलाव नगर पंचायत में लगभग 100 लोगों की 22 बीघा आवासीय और कृषि भूमि अधिग्रहित की जा रही है। एडीएम ने भी स्वीकार किया कि जमीन का मूल्य इससे अधिक होना चाहिए था, लेकिन अब जिला स्तर पर इसमें सुधार संभव नहीं है।

मुख्यमंत्री ने रखी थी आधारशिला

गौरतलब है कि इस परियोजना की आधारशिला 5 अगस्त 2025 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रखी थी। सरकार जहां किसान फार्म रजिस्ट्री के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाने की बात कर रही है, वहीं किसानों का आरोप है कि भू-अर्जन में दोहरी नीति अपनाई जा रही है।

फिलहाल जिला प्रशासन इस पूरे मामले पर खुलकर कुछ भी कहने से बचता नजर आ रहा है, जबकि किसानों ने साफ कर दिया है कि उचित मुआवजा मिलने तक सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं होने देंगे।


 

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