पटना/गोपालगंज। विश्व का सबसे बड़ा सहस्त्रलिंगम शिवलिंग बिहार पहुंच चुका है। इसके आगमन के साथ ही राज्यभर में उत्साह और भक्ति का माहौल बन गया है। गोपालगंज से शुरू हुई इसकी यात्रा खजुरिया और हुसैनी होते हुए पूर्वी चंपारण के केसरिया प्रखंड स्थित कैथवलिया पहुंचेगी, जहां 17 जनवरी को विराट रामायण मंदिर परिसर में इसकी ऐतिहासिक स्थापना की जाएगी। इस आयोजन को बिहार ही नहीं, पूरे देश के लिए एक धार्मिक और सांस्कृतिक उपलब्धि माना जा रहा है।
17 जनवरी की तिथि का विशेष धार्मिक महत्व
शिवलिंग की स्थापना के लिए माघ कृष्ण चतुर्दशी की तिथि चुनी गई है, जिसे धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग की उत्पत्ति से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव की लिंग रूप में पूजा की शुरुआत हुई थी। इसी कारण इस तिथि का महत्व महाशिवरात्रि के समान माना जाता है। ईशान संहिता और अन्य धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यह तिथि शिव स्थापना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।
पांच तीर्थों के जल से होगा अभिषेक
शिवलिंग के अभिषेक के लिए देश के पांच प्रमुख तीर्थ स्थलों—
कैलाश मानसरोवर, गंगोत्री, हरिद्वार, प्रयागराज और सोनपुर—से पवित्र जल मंगाया गया है। स्थापना के दिन इन तीर्थों के जल से अभिषेक किया जाएगा। साथ ही हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा की भी योजना है, जिससे आयोजन को दिव्य स्वरूप मिलेगा।
33 फीट ऊंचा, 210 मीट्रिक टन वजनी शिवलिंग
महावीर स्थान न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल के अनुसार यह शिवलिंग सहस्त्रलिंगम स्वरूप का है। मान्यता है कि इस शिवलिंग पर जल अर्पण करने से 108 शिवलिंगों पर जल चढ़ाने के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।
- ऊंचाई: 33 फीट
- वजन: लगभग 210 मीट्रिक टन
- निर्माण अवधि: करीब 10 वर्ष
- यात्रा अवधि: 45 दिन
प्राण प्रतिष्ठा मंदिर निर्माण के बाद
17 जनवरी को शिवलिंग की स्थापना की जाएगी, लेकिन प्राण प्रतिष्ठा मंदिर निर्माण पूर्ण होने के बाद की जाएगी। फिलहाल नियमित पूजा-अर्चना शुरू होगी।
“शिवलिंग स्थापना के बाद मंदिर निर्माण से जुड़े चार प्रमुख कार्य शेष रहेंगे—सिविल कंस्ट्रक्शन, शिखर निर्माण, पेंटिंग और स्टोन क्लैडिंग। सभी देवी-देवताओं की प्राण प्रतिष्ठा के साथ 2030 तक मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए खोलने का लक्ष्य है।”
— सायण कुणाल, सचिव, महावीर स्थान न्यास समिति
नंदी महाराज और मुख्य प्रतिमाओं का विशेष निर्माण
शिवलिंग स्थापना के बाद नंदी महाराज की भव्य प्रतिमा ब्लैक ग्रेनाइट स्टोन से बनाई जाएगी। इसके साथ ही अयोध्या के राम मंदिर में रामलला की मूर्ति बनाने वाले प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगीराज से मुख्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं तैयार कराने को लेकर बातचीत चल रही है।
गोपालगंज में भव्य स्वागत
शिवलिंग के बिहार प्रवेश पर गोपालगंज में बैंड-बाजा, पूजा-अर्चना और शोभायात्रा के साथ भव्य स्वागत किया गया। एक दिन विश्राम के बाद 5 जनवरी को शिवलिंग गोपालगंज के बलथरी के लिए रवाना होगा।
- सुबह 11 बजे बलथरी में भव्य स्वागत
- विशेष प्रवेश द्वार का निर्माण
- चैनपट्टी में भी श्रद्धालुओं का विशाल जुटान
वेद मंत्रों और यज्ञ के साथ होगी स्थापना
स्थापना के दिन भव्य यज्ञ का आयोजन होगा, जिसमें चारों वेदों के विद्वान शामिल होंगे। पंडित भावनाथ झा के अनुसार:
- पूजा प्रारंभ: सुबह 8:30 बजे
- स्थापना पूर्ण: दोपहर 1:00 बजे तक
- ढलते सूर्य में मूर्ति स्थापना वर्जित मानी जाती है
- पूजा के बाद भोजन प्रसाद का आयोजन
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार करीब 1000 वर्षों बाद सहस्त्रलिंगम शिवलिंग की स्थापना हो रही है, जिससे यह आयोजन बिहार के इतिहास में एक गौरवपूर्ण अध्याय बन गया है।


