बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस मौके पर देशभर के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी जेटली को याद किया।
कड़ाके की ठंड में भी दी व्यक्तिगत श्रद्धांजलि
पटना में भीषण ठंड के बावजूद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कंकड़बाग स्थित पार्क पहुंचे, जहां उन्होंने अरुण जेटली की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है, जिसमें जदयू और भाजपा के वरिष्ठ नेता भी शामिल होते हैं।
दो दशकों की गहरी दोस्ती की मिसाल
नीतीश कुमार और अरुण जेटली की मित्रता दो दशकों से भी अधिक पुरानी रही है। भाजपा में नीतीश के सबसे करीबी मित्र के रूप में अरुण जेटली की पहचान रही। गठबंधन की राजनीति में जेटली ने हमेशा नीतीश का साथ दिया और दोनों दलों के रिश्ते मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।
नीतीश के लिए संकटमोचक थे अरुण जेटली
राजनीतिक गलियारों में माना जाता है कि
अरुण जेटली, नीतीश कुमार के लिए खेवनहार की भूमिका में रहे। नीतीश कुमार अपनी कई अहम राजनीतिक मांगें जेटली की मध्यस्थता से भाजपा से मनवाते रहे।
जेटली के निधन के बाद भी नीतीश उनकी स्मृतियों को जीवित रखे हुए हैं।
प्रतिमा स्थापना और राजकीय समारोह की परंपरा
अरुण जेटली के निधन के बाद
नीतीश कुमार की पहल पर पटना के कंकड़बाग में उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित कराई गई।
हर जयंती और पुण्यतिथि पर राजकीय समारोह आयोजित किया जाता है, जिसमें मुख्यमंत्री स्वयं उपस्थित होकर नमन करते हैं।
जदयू-भाजपा तालमेल के सूत्रधार थे जेटली
पिछले दो दशकों तक
जदयू और भाजपा के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने में अरुण जेटली का सबसे बड़ा योगदान माना जाता है।
पार्टी के भीतर विरोध के बावजूद जेटली ने हमेशा नीतीश कुमार पर भरोसा जताया।
नीतीश को पहली बार मुख्यमंत्री बनाने में अहम भूमिका
साल 2000 में नीतीश कुमार को
सिर्फ सात दिनों के लिए बिहार का मुख्यमंत्री बनाए जाने के पीछे भी
अरुण जेटली की निर्णायक भूमिका मानी जाती है।
उस समय जदयू और भाजपा के भीतर भी पूर्ण सहमति नहीं थी, लेकिन जेटली ने रास्ता बनाया।
2005 में नीतीश को एनडीए का चेहरा बनाने का फैसला
2005 के विधानसभा चुनाव में
अरुण जेटली की पहल पर ही नीतीश कुमार को एनडीए का मुख्यमंत्री चेहरा घोषित किया गया।
इस फैसले का असर चुनाव नतीजों पर पड़ा और गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिला।
अलगाव के बाद भी बनी रही निजी मित्रता
जब नीतीश कुमार भाजपा से अलग होकर
लालू प्रसाद यादव के खेमे में गए, तब भी
अरुण जेटली से उनकी व्यक्तिगत मित्रता कायम रही।
दिल्ली दौरे के दौरान नीतीश कुमार जेटली के आवास पर मुलाकात जरूर करते थे।
2017 में एनडीए में वापसी के पीछे भी जेटली की भूमिका को अहम माना जाता है।
जेटली के निधन पर भावुक हुए थे नीतीश
2019 में अरुण जेटली के निधन की खबर मिलते ही
नीतीश कुमार सभी कार्यक्रम छोड़कर दिल्ली पहुंचे और अंतिम श्रद्धांजलि दी।
इसके बाद बिहार में दो दिनों का राजकीय शोक घोषित किया गया।
आज भी नहीं भूले अरुण जेटली
राजनीतिक विशेषज्ञ प्रिय रंजन भारती के अनुसार,
नीतीश कुमार चाहे भाजपा के साथ हों या अलग,
अरुण जेटली का जिक्र वे हमेशा करते रहे हैं।
“नीतीश कुमार बीजेपी के जिन नेताओं को सबसे अधिक याद करते हैं, उनमें अटल बिहारी वाजपेयी, अरुण जेटली और सुशील मोदी शामिल हैं। जयंती हो या पुण्यतिथि, वे इन आयोजनों में जरूर शिरकत करते हैं।”
— प्रिय रंजन भारती, राजनीतिक विशेषज्ञ


