एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम को लेकर जिला स्तरीय सतर्कता एवं अनुश्रवण समिति की बैठक सम्पन्न

अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन, मुआवजा भुगतान एवं त्वरित न्याय पर दिया गया जोर

भागलपुर, 26 दिसम्बर 2025:
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत गठित जिला स्तरीय सतर्कता एवं अनुश्रवण समिति की वर्ष 2025 की चौथी बैठक समीक्षा भवन, भागलपुर में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला पदाधिकारी, भागलपुर ने की।

बैठक में अधिनियम के प्रावधानों के अक्षरशः एवं प्रभावी अनुपालन को लेकर विस्तृत समीक्षा की गई। जिला पदाधिकारी सह समिति अध्यक्ष ने कहा कि एससी/एसटी समुदाय के पीड़ितों को न्याय, सुरक्षा एवं त्वरित राहत उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मुआवजा एवं पेंशन भुगतान की स्थिति

बैठक में जानकारी दी गई कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान इस अधिनियम के अंतर्गत आवंटित राशि से अब तक 242 पीड़ितों/आश्रितों को मुआवजा राशि का लाभ प्रदान किया जा चुका है।
इस वर्ष जिले में अब तक 196 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें जिला पदाधिकारी की स्वीकृति के उपरांत अधिनियम की धारा के अनुरूप सभी पीड़ितों/आश्रितों को अनुमान्य मुआवजा राशि का भुगतान ससमय सुनिश्चित किया गया है।
इसके अतिरिक्त, एससी/एसटी एक्ट के अंतर्गत 46 आश्रितों को प्रतिमाह अनुमान्य पेंशन राशि का नियमित भुगतान किया जा रहा है।

न्यायालयीन कार्यवाही एवं सजा

नवंबर माह के दौरान जिले के दोनों पुलिस जिलों में इस अधिनियम के अंतर्गत माननीय न्यायालय में विचाराधीन 04 मामलों में अंतिम निर्णय सुनाया गया, जिसमें 03 अभियुक्तों को सजा दिलाई गई।

अधिकारियों को दिए गए निर्देश

बैठक में जिला पदाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि अधिनियम का दुरुपयोग किसी भी स्तर पर न हो तथा अनुसंधान पदाधिकारी पूर्ण संवेदनशीलता के साथ मामलों की जांच सुनिश्चित करें।
एससी/एसटी एक्ट के नोडल अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों को निर्देशित किया गया कि अधिनियम के तहत दर्ज कांडों के अनुसंधान कार्य का सतत एवं ससमय अनुश्रवण किया जाए।

माननीय न्यायालय में आरोप पत्र समर्पित करने हेतु लंबित 270 मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए जिला पदाधिकारी ने पुलिस पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे त्वरित गति से अनुसंधान कार्य पूर्ण कर आरोप पत्र समर्पित करना सुनिश्चित करें

स्पीडी ट्रायल पर जोर

बैठक में उपस्थित दोनों नोडल अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी एवं विशेष लोक अभियोजक को निर्देशित किया गया कि अधिनियम के अंतर्गत दर्ज जघन्य प्रकृति के मामलों में स्पीडी ट्रायल के लिए माननीय न्यायालय में प्रस्ताव उपलब्ध कराने हेतु नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई एक सप्ताह के भीतर पूर्ण की जाए।

अंत में जिला पदाधिकारी ने सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि अधिनियम के तहत पीड़ितों को न्याय एवं राहत दिलाने में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

संयुक्त निदेशक,
जनसंपर्क विभाग, भागलपुर

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