नई दिल्ली/कोलकाता: भारतीय रेलवे ने पश्चिम बंगाल में रेल अवसंरचना को और सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए दक्षिण पूर्व रेलवे के अंतर्गत हावड़ा–खड़गपुर रेल खंड पर स्थित महत्वपूर्ण पुल संख्या 57 के पुनर्निर्माण के लिए 431.76 करोड़ रुपये की परियोजना को स्वीकृति प्रदान की है। यह परियोजना इस व्यस्त रेल कॉरिडोर की सुरक्षा, क्षमता और परिचालन दक्षता को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना के तहत परिवर्तित संरेखण पर पुल की अधोसंरचना यानी सब-स्ट्रक्चर का पुनर्निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही एक नए वायाडक्ट का निर्माण भी प्रस्तावित है, जिससे रेल यातायात को अधिक सुरक्षित और सुचारू बनाया जा सकेगा।
परियोजना में खड़गपुर मंडल के अंतर्गत देउल्टी और कोलाघाट स्टेशनों के बीच एक नए कोलाघाट रेलवे स्टेशन का विकास भी शामिल है। इसके तहत प्लेटफॉर्म का विस्तार, आधुनिक यात्री सुविधाएं, बेहतर पहुंच व्यवस्था और स्टेशन से जुड़े अन्य आधारभूत ढांचे को विकसित किया जाएगा, जिससे यात्रियों को अधिक सुविधा मिल सके।
पुल संख्या 57 पिछले छह दशकों से अधिक समय से इस खंड में रेल परिचालन का महत्वपूर्ण आधार रहा है। हालांकि, समय के साथ सामग्री के क्षरण और बढ़ती परिचालन आवश्यकताओं को देखते हुए इसके पुनर्निर्माण की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। स्वीकृत परियोजना के अंतर्गत एक आधुनिक और मजबूत संरचना तैयार की जाएगी, जो वर्तमान इंजीनियरिंग मानकों के अनुरूप होगी और दीर्घकालिक सेवा विश्वसनीयता सुनिश्चित करेगी।
रेलवे के अनुसार, नए पुल को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि वह बढ़ते धुरी भार, अधिक यातायात घनत्व और 130 किलोमीटर प्रति घंटे तक की ट्रेन गति को संभाल सके। साथ ही, 57 जीएमटी के अधिक सकल टन भार को प्रभावी रूप से वहन करने की क्षमता भी इसमें होगी। इससे न केवल सुरक्षा मानकों में सुधार होगा, बल्कि परिचालन प्रदर्शन और समयबद्धता भी बेहतर होगी।
भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना में चौथी रेलवे लाइन के लिए भी प्रावधान किया गया है। उपलब्ध स्थान, तकनीकी मानकों और लागत को ध्यान में रखते हुए अप लाइन और प्रस्तावित चौथी लाइन—दोनों के लिए एक संयुक्त अधोसंरचना विकसित की जाएगी, जिससे आगे विस्तार की संभावनाएं बनी रहेंगी।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना के पूरा होने से हावड़ा–खड़गपुर रेल खंड पर संपर्क, क्षमता और सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार होगा। यह परियोजना न केवल वर्तमान यात्री और माल परिवहन की जरूरतों को पूरा करेगी, बल्कि भविष्य में बढ़ने वाले रेल यातायात के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार करेगी।


