जीतनराम मांझी के बयान पर सियासी बवाल, कहा– वीडियो भ्रामक, मैंने पुनर्गणना की बात की थी

केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM-S) के नेता जीतनराम मांझी का एक वीडियो इन दिनों सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। वायरल वीडियो में मांझी कथित तौर पर यह कहते नजर आ रहे हैं कि 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में 2700 वोट से हार रहे एक प्रत्याशी को डीएम से फोन कर जितवाया गया था। वीडियो सामने आने के बाद विपक्ष ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया, वहीं मांझी ने इसे भ्रामक और तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया वीडियो बताया है।

मांझी ने दी सफाई

जीतनराम मांझी ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि वायरल वीडियो का अर्थ गलत तरीके से निकाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनका आशय पुनर्गणना (रीकाउंटिंग) से था, न कि किसी प्रकार की गैरकानूनी मदद से।

मांझी ने कहा,

“ये गलत वीडियो है। 2020 के चुनाव में आपने सुना होगा कि पुनर्गणना के बाद 27 वोट से एक उम्मीदवार जीत गया और जदयू का एक प्रत्याशी हार गया था। कहने का मतलब यह है कि रीकाउंटिंग मांगी जाती है।”

उन्होंने आगे कहा कि टिकारी से HAM उम्मीदवार अनिल कुमार ने 2020 में पुनर्गणना की मांग की थी, जिसके बाद वह चुनाव जीत गए थे।

“मेरा कहना था कि इस बार भी उन्हें भागना नहीं चाहिए था और पुनर्गणना मांगनी चाहिए थी।”

तत्कालीन डीएम अभिषेक सिंह का लिया नाम

मांझी ने स्पष्ट किया कि 2020 में अभिषेक सिंह जिलाधिकारी थे, जो एक सक्षम और निष्पक्ष अधिकारी थे।
उन्होंने कहा,

“हमने तत्कालीन डीएम अभिषेक सिंह से पुनर्गणना के आंकड़े मांगे थे और उन्होंने नियमानुसार उपलब्ध कराए। इस बार भी अगर रीकाउंटिंग मांगी जाती, तो संभव था कि हम चुनाव जीत जाते।”

राजद ने किया चुनाव आयोग से शिकायत की मांग

मांझी के बयान के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) आक्रामक हो गया है। राजद नेताओं का दावा है कि यह बयान चुनाव में गड़बड़ी के आरोपों की पुष्टि करता है।

राजद नेता गौतम कृष्णा ने कहा,

“जीतनराम मांझी का बयान स्वीकारोक्ति वाला है। हम मांग करते हैं कि चुनाव आयोग जल्द से जल्द एक टीम गठित कर बिहार विधानसभा चुनावों की निष्पक्ष जांच कराए।”

क्या है पूरा मामला

यह वीडियो गया जिले के मोहनपुर प्रखंड में आयोजित एक अभिनंदन समारोह का बताया जा रहा है। कार्यक्रम बाराचट्टी विधानसभा की विधायक ज्योति देवी के सम्मान में आयोजित किया गया था। इसी दौरान मांझी कहते नजर आ रहे हैं कि 2020 में एक प्रत्याशी 2700 वोट से हार रहा था, लेकिन प्रयास के बाद वह जीत गया। इस बार प्रत्याशी 1600 वोट से हारा और उसने पुनर्गणना की मांग नहीं की, जिससे सीट हाथ से निकल गई।

सियासी हलचल तेज

मांझी की सफाई के बावजूद मामला अब सियासी रंग ले चुका है। जहां सत्तापक्ष इसे विपक्ष की साजिश बता रहा है, वहीं विपक्ष चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर चुनाव आयोग की भूमिका अहम मानी जा रही है।


 

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