भागलपुर में गुरुवार को आध्यात्मिक उल्लास और भक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जब महर्षि संतसेवी परमहंस जी महाराज की 106वीं पावन जयंती के अवसर पर एक भव्य और आकर्षक झांकी निकाली गई। इस आयोजन ने पूरे शहर को श्रद्धा, भक्ति और उत्साह से भर दिया।
झांकी की शुरुआत शहर के बरारी स्थित प्रसिद्ध प्रांगण से हुई। झांकी में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु और संतसेवी परंपरा के अनुयायी शामिल हुए। सभी श्रद्धालु श्री सदगुरु महाराज जी को नमन करते हुए भक्ति गीतों पर झूमते, गाते और नृत्य करते हुए आगे बढ़ते नजर आए। ढोल-नगाड़ों और भक्ति संगीत की गूंज से शहर की सड़कें भक्तिमय वातावरण में डूब गईं।
झांकी में महर्षि संतसेवी परमहंस जी महाराज के जीवन, उनके आध्यात्मिक संदेशों और संतमत की शिक्षाओं को दर्शाती सजीव झांकियां लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं। सत्य, सेवा, प्रेम और सदमार्ग का संदेश देती ये झांकियां श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक चिंतन की ओर प्रेरित करती रहीं।
यह भव्य झांकी कुप्पाघाट आश्रम से निकलकर तिलकामांझी चौक, कचहरी चौक सहित शहर के कई प्रमुख चौक-चौराहों से होकर गुजरी। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने पुष्पवर्षा कर झांकी का स्वागत किया। बड़ी संख्या में लोग सड़क किनारे खड़े होकर झांकी के दर्शन करते और संत परंपरा के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते नजर आए।
आयोजकों ने बताया कि महर्षि संतसेवी परमहंस जी महाराज की जयंती 20 दिसंबर को है। इसे लेकर कुप्पाघाट आश्रम में विशेष तैयारियां की गई हैं। आश्रम परिसर में उत्सव जैसा माहौल है और आने वाले दिनों में भजन-कीर्तन, सत्संग, प्रवचन और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
इस अवसर पर आश्रम के सेवक ने बताया कि महर्षि संतसेवी परमहंस जी महाराज का संपूर्ण जीवन सत्य, सेवा और आध्यात्मिक साधना का प्रतीक रहा है। उनकी जयंती पर निकाली गई यह झांकी लोगों को उनके विचारों से जोड़ने और समाज में आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने का एक सशक्त माध्यम बनी है।
आयोजकों के अनुसार, इस आयोजन के जरिए समाज में प्रेम, शांति, सद्भाव और भाईचारे का संदेश देने का प्रयास किया गया है। झांकी के माध्यम से यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया कि संतमत की परंपरा आज भी समाज को सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।


