ई-चालान निपटान में आ रही दिक्कतों के बाद सरकार सक्रिय, ट्रैफिक चालान अब राष्ट्रीय लोक अदालत में होंगे निबटारे की तैयारी शुरू

बिहार में यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर ट्रैफिक पुलिस द्वारा ई-चालान प्रणाली के माध्यम से फाइन वसूला जा रहा है, लेकिन बड़ी संख्या में चालान समय पर जमा नहीं हो पा रहे हैं। हजारों वाहन मालिकों पर लाखों रुपये का जुर्माना बकाया है, जिसके कारण प्रदूषण प्रमाणपत्र, फिटनेस और अन्य आवश्यक कागजात बनवाने में भी बाधा आ रही है। बढ़ती समस्या को देखते हुए अब सरकार ने ई-चालान मामलों के निपटारे के लिए राष्ट्रीय लोक अदालत का विकल्प तलाशना शुरू कर दिया है।

इस दिशा में गृह विभाग की ओर से महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। विभाग ने अपर पुलिस महानिदेशक (ट्रैफिक) को पत्र लिखकर राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से ई-चालान निपटान की संभावनाओं पर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।

ई-चालान का निबटारा नहीं होने से वाहन मालिक परेशान

गृह विभाग के उप सचिव मनोज कुमार सिन्हा द्वारा एडीजी (यातायात) को भेजे गए पत्र में बताया गया है कि भोजपुर सहित राज्य के कई जिलों में ट्रैफिक ई-चालानों की भारी संख्या बकाया है। कई वाहन मालिकों पर चार से पाँच तक चालान लंबित हैं, जिन्हें समय पर जमा न कर पाने के कारण उनके वाहनों के कागजात का नवीनीकरण प्रभावित हो रहा है।

बिहार ट्रक ओनर एसोसिएशन ने उठाई समस्या, सरकार तक पहुंचाई आवाज

बिहार ट्रक ओनर एसोसिएशन के भोजपुर जिला अध्यक्ष अजय यादव ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया और विभाग को लिखित रूप में सुझाव भेजा। उन्होंने बताया कि:

  • राज्यभर में करोड़ों रुपये के ई-चालान बकाया पड़े हैं
  • वाहन मालिक चालान जमा नहीं कर पा रहे
  • चालान लंबित होने से फिटनेस, प्रदूषण, परमिट और अन्य दस्तावेज नवीनीकरण में रुकावट
  • गाड़ियों का परिचालन प्रभावित, व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों को भारी दिक्कत

संस्था ने सुझाव दिया कि ई-चालान को राष्ट्रीय लोक अदालत में सुनवाई के लिए शामिल किया जाए, जिससे लंबित चालानों का तेजी से निपटारा संभव हो सके।

गृह विभाग ने एडीजी ट्रैफिक को कार्रवाई का निर्देश दिया

प्राप्त सुझावों का संज्ञान लेते हुए गृह विभाग ने एडीजी (ट्रैफिक) से मामले की विस्तृत जांच और आगे की प्रक्रिया सुनिश्चित करने को कहा है। विभाग का मानना है कि यदि ई-चालान मामलों को लोक अदालत में ले जाया जाता है, तो बड़ी संख्या में लोग चालान निपटा सकेंगे और वाहन परिचालन की वर्तमान समस्या काफी हद तक हल हो जाएगी।

अब ट्रैफिक मुख्यालय की ओर से आगे की प्रक्रिया तय की जानी है। यदि प्रस्ताव लागू होता है, तो राज्यभर में लंबित ई-चालानों के निपटारे में तेजी आ सकती है।

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