बिहार में पुलिस अधिकारियों की लापरवाही पर लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में खगड़िया और बेगूसराय जिले में जानलेवा हमले के आरोपितों की गिरफ्तारी में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद डीआईजी आशीष भारती ने आधा दर्जन से अधिक पुलिस इंस्पेक्टरों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं।
डीआईजी ने दोनों जिलों के पुलिस निरीक्षकों के साथ एक विस्तृत समीक्षात्मक बैठक की। इस बैठक में यह तथ्य सामने आया कि लगातार आदेश देने के बावजूद कई थाना क्षेत्रों में वांछित और फरार आरोपितों की गिरफ्तारी उम्मीद के अनुरूप नहीं हुई। कई जगहों पर तो बेहद कम संख्या में गिरफ्तारी हुई, जबकि संबंधित इलाकों में आरोपितों की संख्या काफी अधिक थी।
कई थाना क्षेत्रों में एक भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं
समीक्षा में यह भी स्पष्ट हुआ कि कुछ पुलिस थाना क्षेत्रों में एक भी वांछित आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया। डीआईजी ने इस स्थिति को अपराध नियंत्रण के प्रति घोर लापरवाही और उदासीनता करार दिया। उन्होंने कहा कि अपराधियों की गिरफ्तारी में ढील देना कानून-व्यवस्था को सीधे प्रभावित करता है, जो किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
डीआईजी ने दिए कार्रवाई के आदेश – कई इंस्पेक्टरों को निंदन की सजा, कुछ का वेतन रोका गया
डीआईजी आशीष भारती ने जांच और समीक्षा के आधार पर कई पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की घोषणा की। जिन अधिकारियों को निंदन की सजा दी गई है, उनमें शामिल हैं:
- सुरेंद्र कुमार – इंस्पेक्टर, गोगरी (खगड़िया)
- राजेश कुमार – इंस्पेक्टर, बलिया (बेगूसराय)
- संतोष कुमार – इंस्पेक्टर, तेघड़ा (बेगूसराय)
- सुबोध कुमार – इंस्पेक्टर, मझौल (बेगूसराय)
- अन्य आधे दर्जन अधिकारियों को भविष्य के लिए लिखित चेतावनी
इसके अलावा दो अधिकारियों पर और भी सख्त कदम उठाए गए हैं:
- बीरेंद्र यादव – इंस्पेक्टर, बेगूसराय सदर
- अर्चना कुमारी सिन्हा – इंस्पेक्टर, बेगूसराय नगर
इन दोनों अधिकारियों का वेतन रोका गया है और उनसे स्पष्टीकरण (जवाब तलब) मांगा गया है।
कानून-व्यवस्था को लेकर विभाग सख्त
डीआईजी ने साफ कहा कि वांछित आरोपितों की गिरफ्तारी में ढिलाई किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि लंबित मामलों में जल्द से जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित करें और अपराध नियंत्रण को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।


