
गया (बिहार)। संघर्ष, मेहनत और जुनून—इन्हीं तीन शब्दों ने बिहार के गया जिले के फतेहपुर प्रखंड के बथान गांव के अजय यादव की जिंदगी बदल दी। सड़कों पर रिक्शा चलाकर घर चलाने वाले अजय ने भारतीय सेना में भर्ती होकर जीवन को नई दिशा दी, और अब उन्होंने रूस में आयोजित पावरलिफ्टिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। गुरुवार को गांव पहुंचने पर लोगों ने अपने हीरो का भव्य स्वागत किया।
रूस में बजा भारत का डंका: 83 KG वर्ग में जीता गोल्ड
अजय यादव ने रूस में आयोजित वर्ल्ड पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में 83 किलोग्राम भार वर्ग में 265 किलो वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता। सबसे अहम मुकाबले में उन्होंने ईरान के खिलाड़ी को मात दी और भारत का तिरंगा दुनिया के मंच पर लहराया।
“देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना किसी भी खिलाड़ी के लिए गर्व की बात है। पिछली बार वियतनाम में गोल्ड जीता था। इस बार रूस में फिर भारत को चैंपियन बनाया।”
— अजय यादव, वर्ल्ड पावरलिफ्टिंग चैंपियन
6 महीनों में दूसरा गोल्ड, गांव में जश्न का माहौल
अजय ने लगातार दूसरी बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीता है।
- वियतनाम (जुलाई 2025) — 82 KG वर्ग, 260 KG लिफ्ट
- रूस (दिसंबर 2025) — 83 KG वर्ग, 265 KG लिफ्ट
दोनों बार उन्होंने कई देशों के खिलाड़ियों को पछाड़ते हुए भारत का नाम रोशन किया। रूस में 4 से 7 दिसंबर तक आयोजित चैंपियनशिप में जीत की खबर मिलते ही फतेहपुर और बथान गांव में जश्न शुरू हो गया।
रिक्शा चालक से वर्ल्ड चैंपियन बनने तक की कहानी
गरीबी में गुजरा बचपन
अजय यादव के पिता रामबालक प्रसाद बैलगाड़ी चलाते थे। घर की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। पढ़ाई भी मुश्किल से सरकारी स्कूल में पूरी हुई।
झुमरी तिलैया में चलाया रिक्शा
छात्र जीवन में उन्होंने झारखंड के झुमरी तिलैया में रिक्शा चलाकर घर खर्च चलाया। मजदूरी से लेकर रिक्शा तक, हर काम किया—but संघर्ष ने उन्हें झुकने नहीं दिया।
2010 में सेना में चयन से बदली जिंदगी
कड़ी मेहनत और लगन के बाद अजय का चयन भारतीय सेना में हुआ। उनकी पहली पोस्टिंग असम में रही। सेना में आने के बाद घर की स्थिति सुधरी और उनके जीवन को नई दिशा मिली।
ऐसे शुरू हुई पावरलिफ्टिंग की यात्रा
फिटनेस को लेकर गंभीर रहने वाले अजय को सेना में ही उनके ट्रेनर ने पावरलिफ्टिंग में हाथ आजमाने को कहा। 2016 से उन्होंने प्रोफेशनल स्तर पर ट्रेनिंग शुरू की और जल्द ही सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ते चले गए।
वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में तैनात
आज अजय यादव भारतीय सेना में सेवारत हैं और जम्मू-कश्मीर में उनकी पोस्टिंग है। सेना की ड्यूटी और पावरलिफ्टिंग—दोनों जिम्मेदारियों को वे बखूबी निभा रहे हैं।
फाइनल में ईरान पर शानदार जीत
रूस में हुए फाइनल में भारत और ईरान के बीच कड़ा मुकाबला था। अजय ने अद्भुत ताकत और संतुलन दिखाते हुए 265 किलो का रिकॉर्ड लिफ्ट किया और फाइनल मुकाबला अपने नाम किया। इसके साथ ही उन्होंने एक बार फिर भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया।
गांव ने किया हीरो का स्वागत
गुरुवार को फतेहपुर पहुंचने पर गांव वालों ने फूल-मालाओं और ढोल-नगाड़ों के साथ अजय का भव्य स्वागत किया। ग्रामीणों ने कहा—“अजय ने पूरे बिहार और देश का नाम रोशन कर दिया।”


